
खबर अभी अभी ब्यूरो सोलन
6 जुलाई 2023

नूरपुर(कांगड़ा)। हिमाचल और पंजाब की सीमा पर चक्की दरिया से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध खनन का खामियाजा जल शक्ति विभाग को भुगतना पड़ रहा है। अवैज्ञानिक खनन की मार के चलते भूमिगत जलस्तर में होने वाली गिरावट से हालात चिंताजनक बनते जा रहे है।
जानकारी के मुताबिक जलशक्ति विभाग ने खन्नी, चकवन बासा, घडंरा-झकली खन्नी पेयजल, खन्नी व नक्की सिंचाई योजनाओं के अलावा नक्की, घंडरा, चौगान खन्नी और खन्नी के नलकूपों के अलावा चक्की फेस 3, लोहारपुरा, देवभराड़ी, चौकी, मदनपुर-ठाणा की पेयजल योजनाएं चक्की खड्ड के किनारे जल स्रोतों पर स्थापित की गई हैं। चक्की बैल्ट के सीमावर्ती गांवों जैसे नक्की, छन्नी, माजरा, कंडवाल, खन्नी, पैल, कंडवाल, ढांगूपीर, मैरा, गगवाल असैा अन्य कई इलाकों में लंबे अरसे से अवैध खनन माफिया सक्रिय है। जहां अवैज्ञानिक अवैध खनन के कारण चक्की खड्ड अपनी वास्तविक सतह से कई मीटर तक नीचे चली गई है, जिससे भूमिगत जलस्तर में लगातार गिरावट हो रही है।
इस बावत जलशक्ति विभाग पत्राचार के माध्यम से अवैध खनन की मार झेल रही जल योजनाओं के अस्तित्व पर गहराते संकट बारे प्रशासन को भी अवगत करवाता रहा है। इसके बावजूद जल योजनाओं और पर्यावरण को बचाने के लिए अब नए स्टोन क्रशर लगाने पर पूर्णतया रोक लगाने, पूर्व में स्थापित क्रशरों को नए क्षेत्र अलाट न करने और वैज्ञानिक ढंग से खनन करने को लेकर नई गाइडलाइन जारी करने के बारे में कोई पहल नहीं हो पाई है। आईपीएच विभाग के नूरपुर डिविजन के अधिशासी अभियंता आनंद बलौरिया ने कहा कि अवैज्ञानिक खनन के कारण खड्डों के किनारे जलस्रोतों पर स्थापित पेयजल और सिंचाई योजनाओं के जलस्तर में गिरावट लाजमी है। खासकर गर्मियों के मौसम में जल योजनाओं का लेवल नीचे चला जाता है।
साल 2013 में प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के चलते कंडवाल, सुल्याली, छतरोली, नागाबाड़ी, टीका पैल और टिपरी खड्ड में अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की एक रिजर्व बटालियन भी तैनाती की गई थी, लेकिन महज दस दिन बाद ही बटालियन को वापस बुला लिया गया। इससे पहले भी मार्च 2010 में चक्की खड्ड और टीका पैल में अवैध खनन रोकने के लिए दो पुलिस चौकियां भी स्थापित की गई थी। इसके बावजूद अवैध खनन के कारोबार पर कोई लगाम नहीं लग पाई।
चक्की में अवैध खनन के कारण पंजाब के सीमांत गांवों नारायणपुर हाड़ा, सुखनियाल, लधेटी, खुखियाल, त्रेहटी, हाड़ा नई बस्ती और हरियाल में न सिर्फ जमीनी पानी का स्तर 100 से 150 फीट नीचे चला गया है, बल्कि इलाके में दर्जनों कुएं और बावड़ियां सूख चुकी हैं। यहां तक कि हाड़ा वाटर सप्लाई स्कीम भी बंद हो चुकी है।
पुलिस-प्रशासन की ओर से अवैध खनन के खिलाफ समय-समय कार्रवाई की जाती है। जहां तक माइनिंग के कारण जलशक्ति विभाग की स्कीमों के प्रभावित होने का सवाल है तो जलशक्ति विभाग खड्डों के किनारे स्थापित स्कीमों के आसपास खनन गतिविधियों के बारे में तुरंत प्रशासन को सूचित करें। ताकि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
पंजाब-हिमाचल की सीमा पर बहने वाली चक्की खड्ड की हदबंदी न होने के चलते पड़ोसी राज्य पंजाब का खनन माफिया अवैध खनन को अंजाम देता आ रहा है। हालांकि, गाहे-बगाहे जब कभी पुलिस-प्रशासन या खनन विभाग छापेमारी करता है तो ये लोग अकसर इसकी भनक लगते ही जेसीबी मशीनों और टिपरों में पंजाब की सीमा में भागकर पुलिस को गच्चा दे जाते है। वहीं, सीमांत क्षेत्र में माइनिंग साइट की मार्किंग न होने के चलते खनन माफिया की पुलिस-प्रशासन के साथ आंख मिचौनी रोकने के लिए इंटर स्टेट बार्डर की डिमार्ककेशन का मामला अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाया है।
पंजाब से सटे नूरपुर, इंदौरा, जवाली व फतेहपुर हलकों में खनन गतिविधियों पर नजर रखने के लिएको रोकने एक माइनिंग ऑफिसर के अलावा चार माइनिंग गार्ड और तीन माइनिंग इंस्पेक्टर तैनात है। खनन कार्यालय नूरपुर के तहत करीब 45 स्टोन क्रशर स्थापित है। ऐसे में स्टाफ की कमी के चलते बिना सिक्योरिटी और गाड़ी के माइनिंग अफसर भी रात को खनन माफिया के ठिकानों पर छापामारी करने से कतराते हैं।





