जल, थल पर चलने वाले घातक सैन्य वाहन और खुफिया ठिकाने दुश्मनों को नहीं आएंगे नजर, आईआईटी मंडी ने किया शोध

#खबर अभी अभी शिमला ब्यूरो*

7 फरवरी 2023

देश की सैन्य शक्ति को मजबूत करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक का आविष्कार किया है, जिससे जल, थल पर चलने वाले घातक सैन्य वाहन और खुफिया ठिकाने दुश्मनों के रडार की नजर में नहीं आ पाएंगे। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मटीरियल तकनीक बनाई है, जिसकी परत चढ़ाने से वाहन या खुफिया ठिकाने अत्याधुनिक रडार को भी चकमा देने में सक्षम होंगे।

यह मटीरियल रडार फ्रीक्वेंसी (सिग्नल) की बड़ी रेंज को एब्जॉर्व करने में सक्षम होगा, चाहे रडार के सिग्नल किसी भी दिशा से ऑब्जेक्ट को कवर करना चाहे। स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत रेड्डी, डॉ. अवनीश कुमार और डॉ. भूषण पाधी ने मिलकर यह खोज की है। इस शोध कार्य के निष्कर्ष आई लेटर्स ऑन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी प्रैक्टिस एंड एप्लीकेशन नामक जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।आईआईटी मंडी के डॉ. जी श्रीकांत रेड्डी ने इस शोध के बारे में बताया कि शोधकर्ताओं ने ऐसा आर्टिफिशियल स्ट्रक्चर/मटीरियल तैयार कर लिया है, जो हमारे खुफिया सैन्य वाहनों और खुफिया ठिकानों को दुश्मनों के रडार की नजरों से बचा सकता है। इसका उपयोग खुफिया सैन्य वाहनों और खुफिया सैन्य ठिकानों की खिड़कियों या कांच के पैनलों को सुरक्षा कवच देने के लिए भी किया जा सकता है, जिनका रडार की नजर से बचना जरूरी है। इस टेक्नोलॉजी का विकास फ्रीक्वेंसी सेलेक्टिव सर्फेस (एफएसएस) के आधार पर किया है, जो रडार द्वारा उपयोग किए जाने वाली फ्रीक्वेंसी की बड़ी रेंज को एब्जाॅर्व करती है जिसके परिणामस्वरूप यह सर्फेस रडार को नहीं दिखता है।

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