
ख़बर अभी अभी ब्यूरो सोलन
7 मई 2023
सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में शहीद की चिता को पिता और भाई ने मुखाग्नि दी। प्रमोद अविवाहित थे। अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए और हर आंख नम थी। इस दौरान प्रमोद अमर रहें, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए गए।
इससे पहले हवाई मार्ग से शहीद प्रमोद की पार्थिव देह उत्तराखंड के गरसेन के शहीद रूचिन सिंह रावत के साथ शनिवार दोपहर देहरादून पहुंची थी। इसके बाद देहरादून से सड़क मार्ग से होते हुए जैसे ही तिरंगे में लिपटी प्रमोद की पार्थिव देह शाम 5:00 बजे शिलाई पहुंची, तो समूचे गिरिपार इलाके में चीख-पुकार मच गई।

शाम 6:45 बजे के आसपास वीर सपूत मां भारती की गोद में समा गया। पुलिस व सेना की टुकड़ियों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया। प्रमोद आजादी के ही दिन 15 अगस्त 1997 को जन्मे थे।
शहीद बेटे प्रमोद नेगी के इंतजार में पिछले 29 घंटे से माता तारा देवी और पिता देवेंद्र नेगी ने पलक भी नहीं झपकी थी। घर पर माता-पिता और बहन मनीषा नेगी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, तो सेना में तैनात छोटे भाई जवान नितेश नेगी शुक्रवार से ही पार्थिव देह से लिपट-लिपटकर रो रहे थे।
शनिवार को जैसे ही घर से प्रमोद अनंत यात्रा के लिए निकले तो सड़क किनारे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के विद्यार्थियों ने हाथों में तिरंगा लेकर शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वहीं पहाड़ियों पर बैठे सैकड़ों लोग शहीद की वीरता की गाथा पर चर्चा करते दिखे।
राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान हजारों लोगों की आंखें नम थीं। शनिवार को शहीद के सम्मान में शिलाई बाजार भी बंद रखा गया। शहीद की शहादत पर समूचे गिरिपार में शोक की लहर तो है, लेकिन इलाके के लाखों ग्रामीणों का सीना फख्र से भी चौड़ा हो गया है। समूची शिलाई घाटी प्रमोद नेगी अमर रहे के नारों से गूंज उठी।
उधर, शहीद की माता तारा देवी का कहना था कि प्रमोद अकसर सेना में जाने की जिद करता था। वे कहती थी कि तुम टीचर बनों, लेकिन बेटे की जिद के आगे मां ने भी घुटने टेक दिए।
महज 18 साल की उम्र में प्रमोद नेगी भारतीय सेना की 9 पैरा रेजिमेंट का हिस्सा बन गया। शुक्रवार सुबह राजोरी में आतंकी मुठभेड़ में बहादुर बेटा अदम्य साहस का परिचय देते वक्त वीरगति को प्राप्त हो गया।
ख़बर अभी अभी ब्यूरो सोलन





