

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
20 जुलाई 2023
शिमला के भट्टाकुफर स्थित शिमला नर्सिंग कॉलेज में अंगदान महोत्सव के चलते स्टेट ऑर्गेन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) की ओर से अंगदान के विषय में जागरूकता शिविर लगाया गया, जिसमें कॉलेज की 74 छात्राओं ने शपथ पत्र भरकर अंगदान करने का प्रण लिया। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. कृष्णा चौहान ने छात्राओं को अंगदान शपथ पत्र भरने के लिए प्रेरित किया। सोटो के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार ने कहा कि सोटो संस्था समाज में अंगदान के प्रति लोगों को जागरुक करने का काम कर रही है। अंगदान जरूरतमंद के लिए वरदान साबित हो सकता है। ब्रेन डेड की स्थिति में अंगदान करने वाला व्यक्ति ऑर्गन के जरिए 8 लोगों का जीवन बचा सकता है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों और दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के ब्रेन डेड होने के बाद यह प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। अस्पताल में मरीज को निगरानी में रखा जाता है और विशेष कमेटी मरीज को ब्रेन डेड घोषित करती है। मृतक के अंग लेने के लिए पारिवारिक जनों की सहमति बेहद जरूरी रहती है।
उन्होंने बताया कि देशभर में प्रतिदिन 6000 मरीज समय पर ऑर्गन न मिलने के कारण मरते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लोगों में भ्रांति रहती है कि अंगदान करने के बाद अंगों को बेच दिया जाता है या फिर तस्करी की जाती है। ट्रांसप्लांट ऑफ ह्यूमन एक्ट 1994 जीवित दाता एवं ब्रेन डेड डोनर को अंगदान करने की स्वीकृति प्रदान करता है। यह अधिनियम चिकित्सीय प्रयोजनों के लिए अंगों को निकालने, भंडारण करने और प्रत्यारोपण को नियंत्रित कर मानव अंगों को तस्करी से बचाता है। कोई भी व्यक्ति अंग को खरीद या बेच नहीं सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोटो हिमाचल की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहयोग करें, ताकि जरूरतमंद मरीजों का जीवन समय रहते बचाया जा सके। अंगदान करने के लिए लोग अपनी इच्छा जाहिर करें और अपने रिश्तेदारों को भी इस पुनीत कार्य में जोड़ें। इस कार्यक्रम में करीब 80 छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान सोटो की प्रोग्राम असिस्टेंट भारती कश्यप मौजूद रही।
ब्रेन जीवन को बनाए रखने के लिए मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ब्रेन डेड व्यक्ति स्वयं सांस नहीं ले सकता। सांस लेने के लिए वह वेंटिलेटर पर निर्भर होता है। हालांकि उसकी नब्ज, रक्तचाप व जीवन के अन्य लक्षण महसूस किए जा सकते हैं। ब्रेन का कार्य न करना मृत्यु का लक्षण है। मस्तिष्क में क्षति पहुंचने का कारण ऐसी स्थिति होती है। इस प्रकार के रोगी को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है। कोमा रोगियों और ब्रेन डेड रोगियों के बीच अंतर है। कोमा में मरीज मृत नहीं होता, जबकि ब्रेन डेड व्यक्ति की स्थिति इससे अलग है। इसमें व्यक्ति चेतना व सांस लेने की क्षमता हासिल नहीं कर पाता है। ह्रदय कुछ घंटों या कुछ दिनों के लिए वेंटिलेटर की वजह से कार्य कर सकता है। इस अवधि के दौरान करीबी रिश्तेदारों की सहमति से अंग लिए जा सकते हैं।
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