बद्दी के सैकड़ो मजदूरों ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ किया आंदोलन

#खबर अभी अभी बद्दी ब्यूरो*

11 फरवरी 2024

सीटू, इंटक, एटक सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व दर्जनों राष्ट्रीय फेडरेशनों के आह्वान पर केंद्र व राज्य सरकारों की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ बद्दी में एकत्रित होकर रोष मनाया गया। इस दौरान बद्दी के सैकड़ो मजदूरों ने बद्दी में आज केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजाया। इसमें केंद्र सरकार से श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की ,उनकी छंटनी पर रोक लगाने, ट्रेड यूनियनों ने आज बद्दी में संयुक्त मंच से केंद्र सरकार को चेताया है कि वह मजदूर विरोधी कदमों से हाथ पीछे खींचें अन्यथा मजदूर आंदोलन तेज होगा।

ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के हिमाचल प्रदेश संयोजक डॉ कश्मीर ठाकुर, इंटक प्रदेशाध्यक्ष बाबा हरदीप सिंह, एटक प्रदेशाध्यक्ष जगदीश भारद्वाज व सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि देश में तालाबंदी के दौरान कई राज्यों में श्रम कानूनों को ’खत्म करने’ के विरोध में दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व दर्जनों मजदूरों के साथ केंद्र सरकार की नीतियों पर हिमाचल प्रदेश के जिला,ब्लॉक मुख्यालयों व कार्यस्थलों पर जोरदार प्रदर्शन किये जायेंगे उन्होंने कहा है कि आज केंद्र का शासक वर्ग व सरकारें मजदूरों के खून चूसने व उनके शोषण को तेज करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान में श्रम कानूनों में बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अन्य प्रदेशों की तरह ही कारखाना अधिनियम 1948 में तब्दीली करके हिमाचल प्रदेश में काम के घण्टों को आठ से बढ़ाकर बारह कर दिया गया है।

इस से एक तरफ मजदूरों की भारी छंटनी होगी वहीं दूसरी ओर कार्यरत मजदूरों का शोषण तेज़ हो गया है। फैक्टरी की पूरी परिभाषा बदलकर लगभग दो तिहाई मजदूरों को चौदह श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर दिया गया है। ठेका मजदूर अधिनियम 1970 में बदलाव से हजारों ठेका मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में परिवर्तन से जहां एक ओर अपनी मांगों को लेकर की जाने वाली मजदूरों की हड़ताल पर अंकुश लगेगा वहीं दूसरी ओर मजदूरों की छंटनी की पक्रिया आसान हो जाएगी व उन्हें छंटनी भत्ता से भी वंचित होना पड़ेगा। तालाबंदी, छंटनी व लेबर कोर्ट की प्रक्रिया भी मालिकों के पक्ष में हो जाएगी। इन मजदूर विरोधी कदमों को रोकने के लिए ट्रेड यूनियन संयुक्त मंच से कहा की अगर केंद्र अभी भी नही, जगा तो 16 फरबरी को देशब्यापि हड़ताल करके मजदूरों की आवाज को बुलंद किया जायेगा जिसकी जिमेबारी रहेगी।

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