
खबर अभी अभी ब्यूरो सोलन
10 मार्च 2023
यह सुनने में काफी अलग लगता है कि बिना मिट्टी के भी खेती हो सकती है। हालांकि कृषि वैज्ञानिकों ने बिना मिट्टी के खेती की काफ़ी सारी तकनीकों के बारे में परिचित करवाया है। जिसमें मुख्यतः एयरोपोनिक्स (हवा में खेती करना) और हाइड्रोपोनिक्स (पानी में खेती करना) प्रमुख हैं।
इन विधियों के द्वारा खूब मुनाफा कमाया जा सकता है, परन्तु ज्यादा निवेश या लागत के कारण किसान भाई उपयोग में लाने से संकोच करते हैं। इस विषय को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने इसके वैकल्पिक में कोकोपीट सोइल लैस तकनीक को विकसित किया है जो अन्य विधि की तुलना में कम लागत पर अच्छी पैदावार दे सकती है।
कोकोपीट सोइल लैस तकनीक विधि में पौधों को मिट्टी के बजाय नारियल रेशे की भूसी पर तैयार किया जाता है। इस विधि के द्वारा तैयार किए गए पौधे रोग व कीट रहित होते हैं क्योंकि रोपण सामग्री प्लांट टिशू कल्चर विधि द्वारा विकसित किए जाते हैं।
इस तकनीक की समीक्षा खुशदिल भारती ने की है जो कि पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में पीएचडी रिसर्च स्कॉलर हैं। उन्होंने इस विषय पर अपने शोध के अध्ययन में इस तकनीक की समीक्षा, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, जलंधर (पंजाब) से की है।
खुशदिल भारती ने बताया कि ऊतक संवर्धन तकनीक और सोइल लैस कल्चर मीडियम विधि द्वारा पैदा किए गए आलू G-1 आलू है। अंततः रोग व कीट रहित आलू, बीज आलू को अत्पादित करने से खूब मुनाफा कमाया जा सकता है।
खुशदिल भारती ने बताया कि आलू की खेती में विशेष तौर पर बीज आलू के उत्पादन में किसान भाई सोइल बोर्न बिमारियों के कारण काफी परेशान थे जिसके संदर्व में यह तकनीक रामबाण है तथा यह तकनीक बेरोजगार के इस दौर में रोजगार का अवसर भी प्रदान कर रही है क्योंकि इस विधि द्वारा विकसित किए गए आलू की कीमत लगभग 8-10 रुपए प्रति आलू है।
खुशदिल भारती ने अपने यू ट्यूब चैनल (चैनल नाम : खुशदिल भारती) पर इस विषय पर विस्तृत तौर से विडियो अपलोड किया है, जिसमें इस तकनीक की प्रक्रिया को विस्तारित किया गया है।
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