
ख़बर अभी अभी ब्यूरो सोलन
23 मई 2023

पिछले वर्ष ही पशुओं में पाए जाने वाले लम्पी चमड़ी रोग का कहर झेल चुका पशुपालन विभाग इस दफा किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश के पडोसी राज्य उत्तराखंड और इसके साथ लगते हिमाचल के कुछ क्षेत्रों के पालतू पशुओं में लम्पी चमड़ी के लगातार बढ़ते मामलों को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क हो चुका है।
गौरतलब है कि पिछले साल ही अगस्त माह में लम्पी चमड़ी रोग ने एकाएक ऊना जिला में भी पालतू पशुओं विशेषकर गाय को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था और यह क्रम अक्तूबर माह तक जारी रहा था, इस दौरान ऊना जिला में 11280 पशु लम्पी चमड़ी रोग की चपेट में आये थे जिसमें 1209 पशुओं की मृत्यु हो गई थी जबकि 10071 पशुओं को इस बीमारी से बचा लिया गया था। जिला ऊना में लम्पी चमड़ी रोग की दस्तक के बाद ही पशुपालन विभाग ने 52406 पशुओं का टीकाकरण कर दिया था। अब उत्तराखंड और इसके सीमान्त इलाकों में इस बीमारी की दस्तक के बाद पशुपालन अलर्ट हो गया है।
पशु पालन विभाग के उपनिदेशक डाॅ. जय सिंह सेन ने कहा कि ऊना जिला में पशुपालन विभाग इस बीमारी से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने जिला के सभी पशु पालकों से आग्रह किया कि वे अपने सभी गौवंश का रोग रोधक टीकाकरण करवा लें। यह टीकाकरण जिला के सभी पशु संस्थानों में मुफ्त उपलब्ध है। डाॅ. सेन ने जिला के पशु पालकों से अपील की है कि वे लम्पी चमड़ी रोग से प्रभावित क्षेत्रों से मवेशियों की खरीद फरोखत न करें तथा अपने गौवंश में तेज़ बुखार, भुख न लगना, दूध में गिरावट तथा त्वचा में मोटी-मोटी गांठें जैसे कोई भी लक्षण पाय जाने पर अतिशीघ्र नजदीकी पशु चिकित्सालय या औषाधालय में सम्पर्क करें। डॉ. जय सिंह सेन ने कहा कि अभी तक जिला ऊना में इस रोग का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
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