लोकसभा में सांसद सुरेश कश्यप ने उठाया हिमाचल में खेल अवसंरचना और प्रतिभा पहचान का मुद्दा

शिमला,
भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में खेल अवसंरचना के विकास, खिलाड़ियों की पहचान और प्रशिक्षण को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। उन्होंने खेलो इंडिया नीति–2025 के अंतर्गत हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रावधानों और योजनाओं की जानकारी मांगी।
सांसद सुरेश कश्यप के प्रश्न का उत्तर देते हुए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बताया कि खेलो इंडिया नीति–2025 का उद्देश्य भारत में मजबूत, समावेशी और प्रदर्शन-उन्मुख खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। इसके तहत देशभर में खेल अवसंरचना को मजबूत करने, खिलाड़ियों की पहचान और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि खेल राज्य का विषय होने के कारण खेल अवसंरचना के विकास की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है, जबकि केंद्र सरकार अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यों को सहयोग प्रदान करती है।
उन्होंने जानकारी दी कि खेलो इंडिया योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में कुल 18 खेलो इंडिया केंद्र (KIC) संचालित किए जा रहे हैं, जहां लगभग 280 खिलाड़ियों को पूर्व ओलंपियन खिलाड़ियों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण और खेलों में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय खेल विकास निधि (NSDF) और खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत देशभर में खेल अवसंरचना के निर्माण और उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे खेल सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और यदि उन्हें उचित सुविधाएं और प्रशिक्षण मिले तो प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में हिमाचल प्रदेश में खेल अवसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा।

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