
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
19 मई 2023
दसिरमौर के फूलों की राष्ट्रीय राजधानी में मांग काफी बढ़ गई है। जिले के ट्रांसगिरि इलाके में उगाए जाने वाले बबूने का फूल (कैमोमाइल) 10,000 से 25,000 रुपये क्विंटल घर बैठे ही बिक रहा है। वहीं, किसानों के खेतों से माल सीधा दिल्ली के गाजीपुर पहुंच रहा है। आढ़ती माल लेने के लिए गाड़ियां दिल्ली से सीधे गांव में भेज रहे हैं।
खास बात यह है कि दिल्ली पहुंचते ही माल साथ के साथ ही बिक रहा है और किसानों को राशि का भुगतान भी साथ के साथ ही ऑनलाइन किया जा रहा है। किसानों को अपने उत्पाद के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे किसान मालामाल हो रहे हैं इस फूल की खेती चुनवी, नौहराधार, चौरास, चाढ़ना, पनोग, घंडूरी, शमोगा, देनामानल और बोगधार आदि क्षेत्रों में उगाया जा रहा है।
चुनवी गांव के गोपाल सूर्या ने बताया कि उन्होंने एक बीघा हिस्से में पहली बार बबूने की खेती की है। इसका एक तूड़ान कर चुके हैं। एक पौधा पांच से छह बार फूल दे रहा है। जनवरी में बीज की पनीरी लगाई थी। फरवरी माह में खेतों में रुपाई की। अप्रैल माह में फूल देने शुरू किए। ये सीजन अगस्त तक चलेगा, जिसके उन्हें लहसुन और अदरक से भी काफी बेहतर दाम मिल रहे हैं।
बबूने के फूलों में कई औषधीय गुण हैं। इसी वजह से इसे रामबाण दवा भी कहा जाता है। कम सिंचित होने वाली जगहों पर भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। इसे उत्तरप्रदेश के हमीरपुर और बुंदेलखंड जिलों की बंजर भूमि में भी बड़े स्तर पर उगाया जा रहा है। बबूने के फूलों में दिमाग को शांति पहुंचने वाली लाजवाब खुशबू होती है।
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