
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज चुनाव को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव करवाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुनर्सीमांकन के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव को नहीं टाला जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है।
हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एस एल पी यानी स्पेशल लीव पिटीशन दायर की थी। जिस पर आज सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई की है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने 9 जनवरी को इस मामले पर अपना फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार को प्रदेश में 30 अप्रैल से पहले पंचायत चुनाव सम्पन्न कराने के आदेश दिए थे। इसी फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
राज्य की कांग्रेस सरकार का कहना था कि हिमाचल प्रदेश को बरसात में भारी आपदा का सामना करना पड़ा। प्रदेश में रेस्टोरेशन का काम अभी भी जारी है। सरकार का तर्क था कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है। ऐसे में फिलहाल चुनाव टालने की जरूरत है। राज्य सरकार का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए उच्च न्यायालय की ओर से दिया समय पर्याप्त नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में समय पर पंचायत चुनाव करवाने को लेकर अधिवक्ता डिक्कन कुमार और अन्य की ओर से हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि 31 जनवरी को राज्य में पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। लेकिन राज्य चुनाव आयोग की ओर से पंचायत चुनाव से संबंधित कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। कानून के तहत कार्यकाल पूरा होने से 6 महीने पहले चुनाव को लेकर तैयारी करना आवश्यक है। लेकिन राज्य सरकार इसमें जानबूझकर देरी कर रही है। मामले में सुनवाई के दौरान सरकार ने प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू होने का तर्क दिया था। इसके अलावा राज्य सरकार ने चुनावी प्रक्रिया के लिए समय की मांग करते हुए चुनाव आगे करने की मांग की थी। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के तर्क को खारिज करते हुए 30 अप्रैल से पहले चुनाव करवाने के आदेश दिए थे।





