
एम्स बिलासपुर का रेडियोलॉजी विभाग आने वाले महीनों में अपनी इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी सेवाओं का व्यापक विस्तार करने जा रहा है। संस्थान में जल्द ही अत्याधुनिक बाइप्लेन डीएसए मशीन स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही समर्पित स्ट्रोक इंटरवेंशन सेवाओं की शुरुआत और डीएम इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है।
इस पहल से मरीजों की देखभाल और अकादमिक प्रशिक्षण दोनों को नई मजबूती मिलेगी। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की एक आधुनिक और क्रांतिकारी शाखा है, जिसमें इमेज-गाइडेड तकनीकों जैसे एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड की मदद से शरीर की जटिल बीमारियों का इलाज किया जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बड़ी सर्जरी की जरूरत कम पड़ती है। छोटे-छोटे चीरे लगाकर उपचार किया जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम रहता है और मरीजों को कम दर्द के साथ जल्दी आराम मिलता है।
इन प्रक्रियाओं में मरीजों को अस्पताल में कम समय के लिए भर्ती रहना पड़ता है और वे तेजी से सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। यही कारण है कि आधुनिक चिकित्सा में इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी को बेहद प्रभावी और सुरक्षित उपचार पद्धति माना जा रहा है। रेडियोलॉजी विभाग की कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले ढाई महीनों में ही 100 से अधिक प्रमुख इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
इन प्रक्रियाओं में सिर से लेकर पैरों तक की विभिन्न वैस्कुलर और नॉन-वैस्कुलर इंटरवेंशन शामिल हैं। न्यूरो इंटरवेंशन के तहत स्ट्रोक के मरीजों के लिए कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग और एंबोलाइजेशन प्रक्रियाएं की गईं।
इंटरवेंशनल ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में टीएसीई और बिलियरी स्टेंटिंग जैसी जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गईं। इसके अलावा गंभीर पेरिफेरल आर्टेरियल डिजीज से पीड़ित मरीजों के लिए अंग बचाने वाली एंडोवैस्कुलर तकनीकों का उपयोग किया गया। नसों से संबंधित बीमारियों के उपचार में भी विभाग ने उल्लेखनीय कार्य किया है। वैरिकोज वेन्स के इलाज के लिए ईवीएलए और आरएफए जैसी आधुनिक तकनीकों का नियमित रूप से उपयोग किया जा रहा है।
ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी प्रक्रिया से साफ होगी धमनियों की ब्लॉकेज
संस्थान के कुलपति डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि विभाग की प्रमुख उपलब्धियों में ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी प्रक्रिया का सफल निष्पादन भी शामिल है। यह अत्याधुनिक तकनीक उन धमनियों के ब्लॉकेज को साफ करने के लिए इस्तेमाल की जाती है जिन्हें सामान्य तरीकों से खोलना बेहद कठिन होता है। यह प्रक्रिया एक ऐसे मरीज में की गई, जिसकी सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी और एक्सटर्नल इलिएक आर्टरी में गंभीर कैल्सीफाइड ब्लॉकेज थे।
विशेष बात यह है कि एम्स ऋषिकेश के बाद उत्तर भारत के किसी सरकारी अस्पताल में इस प्रकार की प्रक्रिया के शुरुआती उदाहरणों में से एक माना जा रहा है। यह उपलब्धि रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रमुख डॉक्टर नरवीर चौहान, एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) के नेतृत्व में संभव हो पाई है। इन सभी जटिल प्रक्रियाओं को इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट और एंडोवैस्कुलर विशेषज्ञ डॉक्टर रेशम सिंह ठाकुर द्वारा अंजाम दिया जा रहा है। उन्हें डॉक्टी लोकेश राणा और डॉक्टर वरूण बंसल का मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हो रहा है।





