
शिमला। प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले नई ग्राम सभाओं के गठन और पुनर्गठन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। राज्य चुनाव आयोग ने पंचायती राज विभाग को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि किसी भी नई ग्राम सभा या पंचायत के गठन की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। राज्य चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 13 फरवरी, 2026 को दिए अपने आदेश में निर्देश दिया है कि राज्य चुनाव आयोग, पंचायती राज , शहरी विकास विभाग और एसडीएमए मिलकर 31 मार्च तक सभी लंबित प्रक्रियाओं को पूरा करें, ताकि पंचायत चुनाव 31 मई से पहले करवाए जा सकें। राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि विभाग ने पहले पंचायतों के परिसीमन का कार्यक्रम जारी किया था, जिसके अनुसार 20 मार्च तक परिसीमन पूरा करना और 31 मार्च तक अंतिम आरक्षण आदेश जारी करना तय किया गया था, लेकिन इसके बाद 26 फरवरी को शिमला, सोलन और हमीरपुर जिलों में कुछ नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई।
इसके अलावा 28 फरवरी को लगभग 80 नई ग्राम सभाओं के गठन की भी अधिसूचना जारी की गई। राज्य चुनाव आयोग के अनुसार ग्राम पंचायतों के लगातार गठन, पुनर्गठन या विभाजन से पहले से अधिसूचित वार्डों के परिसीमन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे न केवल पंचायतों, बल्कि पंचायत समितियों और जिला परिषदों के वार्डों के परिसीमन में भी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं और यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन भी माना जा सकता है। राज्य चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 17 नवंबर, 2025 को जारी अधिसूचना के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं की सीमाओं को आदर्श आचार संहिता के तहत स्थिर कर दिया गया था। विभाग ने पहले 31 ग्राम सभाओं के गठन के लिए आयोग से छूट मांगी थी, लेकिन बाद में बिना अनुमति कई नई ग्राम सभाओं की अधिसूचना जारी कर दी गई। ऐसे में आयोग ने पंचायती राज विभाग को सलाह दी है कि किसी भी नई ग्राम पंचायत के गठन या पुनर्गठन की प्रक्रिया को तुरंत रोक दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी ग्रामीण स्थानीय निकायों का परिसीमन और उनकी आरक्षण सूची मार्च, 2026 के अंत तक अंतिम रूप से तय कर जारी कर दी जाए।





