
सिरमौर/फरीदाबाद,
जिला सिरमौर की समृद्ध लोक संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले लोक गायक एवं सांस्कृतिक संरक्षक पूर्ण चंद मीमान को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान 11 अप्रैल 2026 को फरीदाबाद (एनसीआर नई दिल्ली) में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मान समारोह के दौरान प्रदान किया गया।
यह समारोह मैजिक एंड आर्ट विश्वविद्यालय एवं मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली करीब 100 विभूतियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राजेंद्र सैनी (मास्टर ट्रेनर रेडक्रॉस) एवं पूर्व सैनिक राजपाल यादव उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. सीपी यादव ने अतिथियों का स्वागत किया और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
पूर्ण चंद मीमान, जो जिला सिरमौर के संगड़ाह उपमंडल के काखोग गांव के निवासी हैं, को कला एवं लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। उनका यह सम्मान न केवल सिरमौर बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्ण चंद मीमान का नाम एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है।
44 वर्षों से लोक संस्कृति के संरक्षण में समर्पित
पूर्ण चंद मीमान पिछले 44 वर्षों से लोक संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक गाथाओं के संरक्षण में जुटे हुए हैं। उन्होंने “परशुराम सांस्कृतिक दल काखोग” की स्थापना कर क्षेत्रीय संस्कृति को नई पहचान दिलाने का कार्य किया। उनके नेतृत्व में यह दल हिमाचल सहित देश के विभिन्न राज्यों में 5000 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुका है।
इसके अलावा, उनके द्वारा लगभग 40 एल्बम भी रिलीज किए जा चुके हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब पर उपलब्ध हैं और दर्शकों द्वारा सराहे जा रहे हैं।
लोक परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास
पूर्ण चंद मीमान द्वारा रामायण और महाभारत जैसी पौराणिक गाथाओं को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। साथ ही विभिन्न पारंपरिक पर्वों और अवसरों पर वे झुरी, हरूल, नाटी, मुजरा जैसी लोक विधाओं की प्रस्तुति देते हैं।
उनकी प्रमुख पारंपरिक गाथाओं में हाकुमिया, सोमा, टिकरी, छीचा, नियुदी, झमकू, कोमिया, कनकु और डेरा चांदु शामिल हैं, जिन्हें समय और परंपरा के अनुसार प्रस्तुत किया जाता है।
युवाओं को दिया संस्कृति से जुड़ने का संदेश
पूर्ण चंद मीमान का मानना है कि आधुनिकता और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से दूर होती जा रही है। इसके साथ ही नशे की बढ़ती प्रवृत्ति भी चिंता का विषय है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया है कि वे नशे से दूर रहकर अपनी संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को अपनाएं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपने सांस्कृतिक दल में 20-30 युवाओं को जोड़कर उन्हें संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया है।
पूर्ण चंद मीमान का यह योगदान न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण है, बल्कि युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने का भी प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।





