हिमाचल: पंचायतों में दौड़ेगी विकास की गाड़ी, लगभग दोगुना मिलेगा बजट; 16वें वित्तायोग से मिलेंगे 3744 करोड़

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अब विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं रहेगी। 16वां वित्त आयोग के तहत राज्य की पंचायतों को 3744 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी, जो 15वां वित्त आयोग के दौरान मिले करीब 2100 करोड़ रुपये से लगभग दोगुनी है। इससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। मई के पहले सप्ताह में पंचायतों के नवनियुक्त जनप्रतिनिधियों को गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इसके बाद वे बढ़े हुए बजट के साथ विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा सकेंगे। इस अतिरिक्त राशि का उपयोग ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत, स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने, सामुदायिक भवनों के निर्माण और पंचायत घरों के सुधार जैसे कार्यों पर किया जाएगा। इससे ग्रामीण ढांचे में सुधार के साथ-साथ लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
बढ़े हुए बजट से पंचायतें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी सशक्त होंगी। पंचायत प्रतिनिधियों को अब विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। पूरी व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार पंचायतों को सीधे धनराशि उपलब्ध कराएगी, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार इसकी निगरानी करेगी। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि आवंटित धन का सही उपयोग हो और योजनाएं तय समय में पूरी हों। इसके लिए संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

गांवों में बुनियादी सुविधाएं सुधरेंगी
16वां वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। आने वाले पांच वर्षों में पानी की नई योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिनमें फिल्टर सिस्टम की सुविधा भी शामिल होगी। इसके साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुदृढ़ किया जाएगा। लोगों को घर के नजदीक ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं।

स्वच्छता पर फोकस
अगले पांच वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पंचायत स्तर पर कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ ही ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास भी तेज किए जाएंगे।

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