छावनी अधिनियम के तहत गठित हर बोर्ड आता है नगर पालिका की श्रेणी में

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरोे*

24 मई 2023

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छावनी अधिनियम और नगर पालिका के संबंध में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने अपने एक निर्णय में कहा है कि छावनी अधिनियम के तहत गठित हर बोर्ड नगर पालिका की श्रेणी में आता है। अदालत ने सुबाथू छावनी बोर्ड के गैर-सदस्यों की ओर से पानी की दरों को बढ़ाने के निर्णय को निरस्त कर दिया है। सुबाथू छावनी बोर्ड के सिर्फ दो सदस्यों ने ही पानी की दर आठ रुपये से बढ़ाकर 53.50 रुपये कर दिए थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने निखिल गुप्ता की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया।

अदालत ने कहा कि जब छावनी को संविधान के अनुसार नगर पालिका माना जाता है तो इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है कि छावनी एक लोकतांत्रिक संस्था है। इस कारण सरकारी अधिकारियों का निर्णय मान्य न होकर छावनी के ऐसे सदस्य जो सरकारी अधिकारी नहीं है, उनका निर्णय अंतिम माना जाता है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सुबाथू छावनी बोर्ड के सिर्फ दो सदस्यों ने ही 19 जुलाई 2021 को प्रस्ताव पारित कर पानी की दर आठ रुपये से बढ़ाकर 53.50 रुपये कर दी थी। दलील दी गई थी कि छावनी बोर्ड की ओर से लिया गया यह निर्णय संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। अदालत के बताया गया था कि पहले यह बोर्ड फरवरी 2021 को निरस्त हो गया था। इसके बाद सिर्फ दो सदस्यों की ओर से ही लिया गया निर्णय न्यायोचित नहीं है

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