
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि स्कूलों के युक्तिकरण के बाद मर्ज स्कूलों के भवन खाली नहीं रहने चाहिए। इन्हें डिजिटल लर्निंग सेंटर, प्री-प्राइमरी कक्षाएं, कौशल विकास लैब, खेल सुविधाएं, महिला मंडल गतिविधियां या सामुदायिक संसाधन केंद्र के रूप में उपयोग किया जाए। प्राथमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के बीच प्रशासनिक बाधाएं खत्म किया जाए और प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल मैदान और शिक्षकों का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जाए। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जिला उपनिदेशकों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।
बैठक में जिलावार शैक्षणिक स्तर, प्रशासनिक व्यवस्था और स्कूलों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जिला स्तर पर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और सीखने के परिणामों में सुधार की सीधी जिम्मेदारी उपनिदेशकों की होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि समग्र शिक्षा के तहत जारी सभी धनराशि 31 मार्च 2026 तक परिणाम आधारित तरीके से खर्च की जाए। संसाधनों का उपयोग कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कक्षाओं में सुधार स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। बजट का प्रयोग नहीं होने की स्थिति में उपनिदेशकों की जवाबदेही तय होगी। शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के 1,970 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान और वाणिज्य संकाय की स्थिति की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में 818 स्कूलों में विज्ञान और 799 स्कूलों में वाणिज्य संकाय संचालित हैं।
मंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षकों और संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि विलय सरकारी स्कूलों को बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा और संबंधित प्रधानाचार्यों को केंद्र समन्वयक नियुक्त कर सीधे जवाबदेह बनाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा और लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाए। पहले से चिन्हित संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर विशेष निगरानी रखने को भी कहा गया। विभागीय आंकड़ों की रियल टाइम निगरानी के लिए एक क्लिक पर डेटा उपलब्ध कराने वाली डिजिटल प्रणाली विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में पीएम श्री स्कूल, शिक्षकों और विद्यार्थियों की डिजिटल उपस्थिति तथा निशुल्क जेईई-नीट कोचिंग कार्यक्रम पर भी प्रस्तुतियां दी गईं। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने भी बैठक में सुझाव रखे। समग्र शिक्षा परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, सभी जिलों के उपनिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नहीं देने वाले निजी संस्थानों पर होगी कार्रवाई
बैठक में कुछ निजी स्कूलों द्वारा सरकारी सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को समय पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) जारी नहीं करने के मामलों पर भी चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का निर्धारित समय सीमा में निपटारा किया जाए ताकि किसी भी छात्र का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नहीं देने वाले निजी संस्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पदोन्नत प्रधानाचार्यों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
शिक्षा मंत्री ने कहा कि नए पदोन्नत प्रधानाचार्यों के लिए इंडक्शन प्रशिक्षण आयोजित किए जाएं। उन्होंने विद्या समीक्षा केंद्रों को डेटा विश्लेषण को और मजबूत बनाने को कहा। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक की निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए मंत्री ने उपनिदेशकों को समय पर पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने एमआईएस रिपोर्टिंग, छात्र स्वास्थ्य जांच, आयरन-फोलिक एसिड व कृमिनाशक दवा वितरण तथा पीएम पोषण योजना के तहत मिड-डे मील की ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग को मजबूत बनाने को भी कहा। खेल छात्रावासों को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने के निर्देश भी दिए।





