कुल्लू साहित्य उत्सव-2026 के दूसरे दिन लोक संस्कृति और पर्यावरण पर हुई गहन चर्चा

कुल्लू साहित्य उत्सव-2026 के दूसरे दिन का शुभारंभ सहायक आयुक्त, उपायुक्त कुल्लू डाॅ. जयबती ठाकुर ने किया। दूसरा दिन का प्रथम सत्र लोक संस्कृति पर आधारित था, जिसमें प्रोफेसर वरयाम सिंह, तोबदन और यतिन पंडित प्रमुख वक्ता रहे।

हिमतरु प्रकाशन समिति, जिला प्रशासन तथा भाषा संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कुल्लू साहित्य उत्सव-2026 के प्रथम सत्र के वक्ता प्रोफेसर वरयाम सिंह ने बंजार क्षेत्र में लोक संस्कृति और परम्पराओं पर अपना वक्तव्य दिया। वरयाम सिंह ने बताया कि यहां की संस्कृति देव परम्पराओं पर निर्भर है, जो कि जीवंत है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संस्कृति को हमें बचाना है जबकि विकृत्ति से हमें हमेशा बचना है।

दूसरे वक्ता तोबदन ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान दौर में भाषा संस्कृति लुप्त हो रही है, परम्पराएं खत्म होने को हैं। हमारे जो पुराने शब्द थे, जो खेती-बाड़ी, रहन-सहन, खान-पान और दिनचर्या के लिए प्रयोग होते थे, वे कम्यूनिकेशन गेप के चलते खत्म हो रहे हैं। नई पीढ़ी बुजुर्ग लोगों से दूर हो रहे हैं, जिसका यही प्रमुख कारण है। उन्होंने युवाओं से किसी भी सूरत में अपने कल्चर को बचाए रखने की मांग की है।

दूसरे दिन के प्रथम सत्र के अंतिम वक्ता भाषाविद यतिन पंडित ने कहा कि कुल्लू जनपद ही नहीं बल्कि अन्य प्रांतों में भी वहां की लोक संस्कृति देव संस्कृति से सम्बद्ध है। सोशल मीडिया के चलते इसका विस्तार बढ़ा है। लोगों की रूची बढ़ रही है उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे देव संस्कृति या लोक संस्कृति को अधिक जटिल न बनाएं बल्कि सहजता के साथ अपनाएं।

साहित्य उत्सव का दूसरा सत्र ‘लोक कलाएं और पर्यावरण ‘ विषय पर आधारित था, जिसमें मुम्बई से सम्बद्ध लेखिका एवं कलाकारा सुमनिका सेठी ने कलाओं के माध्यम से किस प्रकार से लोक संस्कृति को सहेजा जा सकता है, ओडियो-वीडियो के माध्यम से खूबसूरत तरीके से अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य भले ही कितनी शक्तियां अर्जित करें लेकिन वह प्रकृति का अंशमात्र भी रचना नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सृष्टि ही नियामक है, लोक उसके आधार हैं, जिसमें संगीत, नृत्य और रंगों की उत्पत्ति हुई है। इसके प्रकृति को सहेजना आवश्यक है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डाॅक्टर जयबंती ठाकुर ने आयोजक मण्डल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि निश्चित तौर पर इस तरह के आयोजन से साहित्य संस्कृति का विस्तार होतगा।
इस दौरान हिमतरु प्रकाशन समिति तथा साहित्य उत्सव समिति के तमाम पदाधिकारी, सदस्यगण, साहित्यकार और शोदार्थी-विद्यार्थी मौजूद रहे।
कुल्लू ब्यूरो सुशांत शर्मा की रिपोर्ट..

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