
निजी स्कूलों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों को लेकर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस बार सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी निजी स्कूल में अधीक्षक और उपाधीक्षक की ड्यूटी उसी स्कूल के शिक्षकों की नहीं लगाई जाएगी। परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इन पदों पर सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। जानकारी के अनुसार बोर्ड प्रबंधन ने पूर्व में निजी स्कूलों में बने परीक्षा केंद्रों के बारे में मिली शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि जिन परीक्षा केंद्रों पर अधीक्षक या उपाधीक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है, उसकी जानकारी तुरंत बोर्ड कार्यालय को उपलब्ध करवाई जाए।
ऐसे परीक्षा केंद्रों शिक्षा बोर्ड की ओर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। बोर्ड प्रबंधन ने यह कदम परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से उठाया है। सरकारी शिक्षकों की तैनाती से परीक्षा केंद्रों की निगरानी सुदृढ़ होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लगाई जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले निजी स्कूलों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों में अगर सरकारी कर्मचारी अधीक्षक या उपाधीक्षक के पद पर तैनात नहीं होता था तो वहां पर संबंधित स्कूल को अपने शिक्षकों को अधीक्षक और उपाधीक्षक लगाने की अनुमति दी जाती थी। इस बार बोर्ड प्रबंधन ने इस अनुमति को रद्द करते हुए बोर्ड स्तर पर ही इन पदों पर तैनाती करने की बात कही है।
शिक्षा बोर्ड को निजी स्कूलों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों की पूर्व में शिकायतें मिलती रही हैं। इसके चलते इस बार इन परीक्षा केंद्रों पर सख्ती बरती गई है। परीक्षा केंद्रों में अधीक्षक और उपाधीक्षक की तैनाती शिक्षा बोर्ड ही करेगा। सभी स्कूलों से परीक्षा केंद्रों में अधीक्षक-उपाधीक्षक तैनाती की रिपोर्ट मांगी गई है। जिन परीक्षा केंद्रों में तैनाती नहीं हुई होगी, वे स्कूल एक-दो दिन के लिए अपने स्तर पर व्यवस्था कर सकते हैं। इसके बाद शिक्षा बोर्ड की ओर से तैनात अधीक्षक और उपाधीक्षक ही वहां पर बोर्ड परीक्षाओं की निगरानी करेंगे।





