
मंडी,
जिला स्तरीय नार्को समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि आने वाले वित्तीय वर्ष में नशामुक्ति को लेकर व्यापक, बहुस्तरीय और परिणामोन्मुख रणनीति अपनाई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे की समस्या से निपटने के लिए जागरूकता, आपूर्ति पर नियंत्रण, मांग में कमी, पुनर्वास सहयोग तथा कड़ी कानूनी कार्रवाई सहित सभी पहलुओं को एक साथ लेकर समन्वित अभियान चलाया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि नशे की रोकथाम को जनआंदोलन का स्वरूप देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शिक्षा संस्थानों, पंचायतों, शहरी निकायों, सामाजिक संगठनों तथा संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। जिले के सभी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों, निजी एवं सरकारी महाविद्यालयों तथा पंचायत स्तर पर चरणबद्ध और सतत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक विद्यालय में प्रति माह कम से कम एक नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित करना सुनिश्चित किया जाएगा, जिसकी नियमित समीक्षा भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक पंचायत और शहरी निकाय में वार्ड स्तर पर नशा निवारण समितियों का गठन किया जा चुका है। युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक, रचनात्मक और उत्पादक गतिविधियों की ओर मोड़ने पर विशेष बल दिया जाएगा, ताकि वे नशे से दूर रहकर समाज निर्माण में योगदान दे सकें।
विभागीय समन्वय से बनेगा वार्षिक शैड्यूल
स्वास्थ्य विभाग के डॉ पवनेश ने अवगत कराया कि आगामी वित्तीय वर्ष में विभाग वर्षभर नशा जागरूकता अभियान संचालित करने की योजना पर कार्य कर रहा है। इस अभियान में उपचार की अपेक्षा रोकथाम और परामर्श को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक माह एक विशिष्ट विषय निर्धारित कर विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर स्वास्थ्य कर्मी संवाद करेंगे और नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देंगे।
उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि कल्याण विभाग तथा शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रमों का वार्षिक कैलेंडर तैयार किया जाए, ताकि अभियान निरंतर, सुनियोजित और प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
हॉट स्पॉट पर पुलिस की बढ़ी निगरानी
उपायुक्त ने बताया कि आमजन से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जिले में चिन्हित नशे के हॉट स्पॉट क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम में जनसहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा किसी भी प्रकार की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।
बैठक में पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने जानकारी दी कि जनवरी और फरवरी माह के दौरान एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत कुल 56 मामले दर्ज किए गए तथा 84 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें अफीम डोडा के 2, हेरोइन के 19, चरस के 31 और प्रतिबंधित दवाओं के 4 मामले शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि जनवरी माह में 172.27 ग्राम हेरोइन तथा फरवरी में 33.127 ग्राम हेरोइन जब्त की गई। चरस की बरामदगी जनवरी में 10.451 किलोग्राम तथा फरवरी में 3.803 किलोग्राम रही, जबकि जनवरी में 138.165 किलोग्राम पोस्त का चूरा भी जब्त किया गया।
अवैध संपत्ति पर भी कड़ी कार्रवाई
बैठक में पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत वित्तीय जांच से संबंधित 15 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 34 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। इनमें से 3 मामलों में आरोपियों की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं तथा 2 मामलों में अटैचमेंट की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने बताया कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत 18 मामलों को पुलिस मुख्यालय के माध्यम से एडवाइजरी बोर्ड को प्रेषित किया गया है। वर्ष 2026 में अब तक 5 नए मामले भेजे जा चुके हैं, जिनमें से 4 मामलों में डिटेंशन के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में एनडीपीएस मामलों में संलिप्त अपराधियों द्वारा अवैध रूप से अर्जित चल एवं अचल संपत्तियों की व्यवस्थित पहचान कर अधिक से अधिक संपत्तियों को कुर्क अथवा जब्त किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नशीले पदार्थों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। जांच अधिकारियों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि अनुसंधान की गुणवत्ता सुदृढ़ हो और न्यायालय में दोष सिद्धि सुनिश्चित की जा सके।





