
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में विभिन्न श्रेणियों के तहत स्वीकृत पदों और रिक्तियों का विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले के प्रभावी निपटारे के लिए यह जानना आवश्यक है कि विभिन्न कोटा श्रेणियों के तहत वर्तमान में कितने पद उपलब्ध हैं और उनमें से कितने खाली पड़े हैं। अधूरे तथ्यों पर फैसला नहीं हो सकता। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर जानकारी उपलब्ध कराए कि निर्धारित चयन एजेंसी के माध्यम से 37.5 फीसदी कोटा के तहत होने वाली सीधी भर्ती, 32.5 फीसदी बैच-वाइज आधार पर की जाने वाली नियुक्तियां, 25 फीसदी पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने वाले पद और 5 फीसदी इन-सर्विस एसएमसी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कितने पद हैं। अदालत ने आदेश दिया कि पदों के इस वर्गीकरण के साथ-साथ रिक्त पदों का डाटा भी पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। अदालत ने सुभाष कुमार एवं अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि नियमित भर्ती के पात्र उम्मीदवारों का तर्क है कि राज्य सरकार नियमित भर्ती के बजाय बैक-डोर एंट्री के माध्यम से एसएमसी शिक्षकों को समायोजित करने की कोशिश कर रही है। सरकार ने 17 फरवरी 2025 को नियमों में संशोधन कर एसएमसी शिक्षकों के लिए 5 फीसदी कोटा निर्धारित किया है, जिसके तहत 1427 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है। एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के खिलाफ हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में एसएमसी शिक्षकों को नियमित भर्ती होने तक पद पर बने रहने की अनुमति दी थी। ये शिक्षक 2012 से सेवा दे रहे हैं और कई उम्र की सीमा पार कर चुके हैं, इसलिए सरकार ने उन्हें आयु में छूट और कोटा दिया है। सरकार अन्य श्रेणियों (सीधी भर्ती और बैच-वाइज) के लिए भी 32.5 फीसदी और 37.5 फीसदी कोटे के तहत भर्ती कर रही है।





