
चेस्टर हिल के मामले में एक से बढ़कर एक नए खुलासे हो रहे हैं। इसमें एक कृषक की वार्षिक आय वर्ष 2017 तक मात्र 6 लाख रुपये वार्षिक थी, जबकि पांच साल में ही वह दोगुना दिखा दी गई। इसके साथ ही कृषक ने 275 बीघा भूमि भी खरीद ली। यह भूमि उसने अपनी पत्नी और दो बहनों के नाम पर खरीदी। कसौली क्षेत्र में तीन जगहों पर यह जमीनें खरीदी गईं। एसडीएम ने जब मामले की जांच शुरू की तो आयकर रिटर्न के आंकड़ों ने इस पूरे लेन-देन पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आकलन किया कि 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के दौरान कृषक की औसत वार्षिक आय लगभग 6 लाख रुपये थी, जबकि 2019-20, 2020-21 और 2021-22 में यह औसतन 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंच गई।
सवाल यह भी है कि अगर उसकी आय 12 लाख रुपये भी है तो वह एक साथ 275 बीघा जमीन कैसे खरीद सकता है। वहीं, उसने आठ करोड़ रुपये का लोन भी बैंक से लिया, उसका भी तय समय से पहले ही भुगतान कर दिया गया। इन आंकड़ों के आधार पर संदेह जताया जा रहा है कि इतनी सीमित आय वाले व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में जमीन खरीदना आर्थिक रूप से संभव नहीं लगता। यहां पर भी चेस्टर हिल के नए फ्लैट बनाए जाने थे। हालांकि, अब उपायुक्त ने इसका भी रिकॉर्ड तलब किया है। इन सभी जगहों पर कितनी जमीन खरीदी गई और कितने पैसे दिए गए, इसका रिकॉर्ड भी संबंधित क्षेत्र के तहसीलदारों से मांगा गया है। रिकॉर्ड आने पर इसमें कई अन्य खुलासे भी हो सकते हैं।
चेस्टर हिल प्रोजेक्ट की कसौली व परवाणू क्षेत्र में खरीदी गई सभी जमीन का रिकॉर्ड तलब किया गया है। यह जमीन कितने में खरीदी गई और इनकी मार्केट वैल्यू क्या है, इसकी पूरी जांच की जा रही है। अगर इसमें कोताही पाई जाती है तो नियमों के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -मनमोहन शर्मा, उपायुक्त सोलन





