सलोगड़ा के ‘डकेच’ गांव का गौरव: डॉ. रमेश कुमार अब बनाएंगे शोध के नए शिखर, HPU ने दी पीएचडी सुपरवाइज़र की मान्यता


खबर अभी अभी ब्यूरो सोलन
18 अप्रैल ,26 राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय सोलन के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि रसायन विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) द्वारा पीएचडी सुपरवाइज़र के रूप में मान्यता प्रदान की गई है । विश्वविद्यालय की आधिकारिक सूची में नाम शामिल होने के साथ ही डॉ. कुमार अब रसायन विज्ञान के क्षेत्र में शोधार्थियों का मार्गदर्शन करने के लिए अधिकृत हो गए हैं ।शोध और अकादमिक क्षेत्र में बेमिसाल उपलब्धियांडॉ. रमेश कुमार का शैक्षणिक और शोध करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उनकी विशेषज्ञता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:उनके 20 शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित और उच्च-प्रभाव वाले पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं।वे 6 पुस्तकों के लेखक हैं और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में 35 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं।डॉ. कुमार ने 30 से अधिक वेबिनार में सक्रिय भागीदारी की है और 10 से अधिक राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में रिसोर्स पर्सन के रूप में सेवाएं दी हैं।वैश्विक स्तर पर पहचान (Google Scholar आंकड़े)शोध की दुनिया में डॉ. कुमार का प्रभाव उनके ‘Google Scholar’ आंकड़ों से स्पष्ट होता है:Citations: उनके शोध कार्य को दुनिया भर में 850 से अधिक बार उद्धृत (cite) किया गया है।h-index: 15 | i10-index: 19उनके दो महत्वपूर्ण शोध पत्र, जो Journal of Colloid and Interface Science और Talanta जैसे प्रसिद्ध जर्नल्स में छपे हैं, व्यक्तिगत रूप से 100 से अधिक बार उद्धृत किए जा चुके हैं।माटी का लाल: सलोगड़ा से सफलता का सफरडॉ. रमेश कुमार मूलतः सोलन जिले के सलोगड़ा क्षेत्र के गांव डकेच से संबंध रखते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (GSSS) सलोगड़ा से प्राप्त की। यह क्षेत्र के लिए विशेष उपलब्धि है क्योंकि वे अपने गांव के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने केमिस्ट्री में पीएचडी की और अब पीएचडी सुपरवाइज़र बनने का गौरव हासिल किया है।इस उपलब्धि पर कॉलेज प्रशासन, प्राध्यापक वर्ग और क्षेत्रवासियों में हर्ष की लहर है। सभी का मानना है कि डॉ. कुमार की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनेगी।

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