
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
9 अगस्त 2023

राजधानी शिमला में उत्पादी बंदरों और लंगूरों से परेशान कार मालिकों के लिए राहतभरी खबर है। कारों की छतों पर चढ़कर उछलकूद मचाने वाले बंदरों से निपटने के लिए अब सुरक्षा कवच उपलब्ध होगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) के छात्रों ने यह उपकरण तैयार किया है। संस्थान के विद्यार्थियों के समूह ने डा. संजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुरक्षा कवच उपकरण मॉडल का सफल प्रयोग भी कर लिया है।
खास तरह की सामग्री से यह सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। सुरक्षा कवच कारों या अन्य वाहनों की छतों पर लगेगा। उत्पादी बंदर जैसे ही कार की छत पर चढ़कर उछलकूद शुरू करेंगे, कवच के प्वाइंट के संपर्क आते ही उन्हें करंट का झटका लगेगा। इस के बाद बंदर दोबारा उछलकूद नहीं करेगा। हालांकि, सुरक्षा कवच से बंदर के स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं होगा। साथ ही कारों को होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकेगा। सुरक्षा कवच उपकरण को तैयार करने में दस हजार तक का अनुमानित खर्च आएगा।
बीटेक इलेक्ट्रिकल के आर्यन शर्मा, अनुष्का डोगरा और अंशुल भारद्वाज ने बताया कि शिमला के हर क्षेत्र में उत्पादी बंदर कारों या अन्य वाहनों की छतों पर उछलकूद कर नुकसान पहुंचाते हैं। इस समस्या से लोगों को परेशानी को देखते हुए शिक्षक संजय शर्मा ने उन्हें इस प्रोजेक्ट पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। सुरक्षा कवच बनाने में अरविंदम कुठियाला, संचित वर्मा और मंजुल ठाकुर ने भी सहयोग किया।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा कवच के मॉडल का छात्रों ने अपने ऊपर प्रयोग किया, जिससे उन्हें जोर का झटका लगा। छात्रों का कहना है कि इस सुरक्षा कवच से बंदरों को सहन करने लायक 0.56 मल्टी मीटर का ही झटका ही लगेगा। उपकरण में इनवर्टर का उपयोग किया है। संस्थान के निदेशक प्रो. अमरजीत सिंह ने कहा कि छात्रों का यह प्रोजेक्ट शिमला और बंदर बहुल्य क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी है। इसका प्रयोग सफल रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान इसका पेटेंट करवाने और इसे स्टार्टअप योजना के तहत लाने का प्रयास करेगा।
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