एनएचएआई अधिनियम के तहत मुआवजा निर्धारण में देरी होने पर मध्यस्थ बदलने की जरूरत

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

20 अगस्त 2023

HP High Court: Need to change arbitrator in case of delay in determining compensation under NHAI Act

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एनएचएआई अधिनियम के तहत भूमि के मुआवजा निर्धारण में हो रही देरी को गंभीरता से लिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि मंडलायुक्तों पर अत्यधिक बोझ होने के कारण मध्यस्थ को बदलने की जरूरत है। अदालत ने मध्यस्थ बदलने पर विचार करने के लिए एनएचएआई और केंद्र सरकार को आदेश दिए हैं।

अदालत ने अपने आदेशों की अनुपालना के लिए 22 सितंबर तक रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि केंद्र सरकार ने मंडलायुक्त शिमला और मंडी को मुआवजा निर्धारण के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है। दोनों ही मंडलायुक्तों से एनएचएआई अधिनियम के तहत मामलों का निपटारा नहीं हो रहा है।

अदालत ने कहा कि यदि सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों या अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों को मुआवजा निर्धारण की शक्तियां प्रदान की जाती हैं तो यह उपयुक्त होगा। अदालत को बताया गया कि मंडलायुक्त शिमला के समक्ष 869 और मंडी के समक्ष 2660 मामले लंबित हैं। इनमें से कुछ एक तो वर्ष 2015 से लंबित हैं।

केंद्र सरकार ने 22 मार्च 2012 को जारी आदेशों के तहत राजस्व जिलों शिमला और सोलन के लिए मंडलायुक्त शिमला और बिलासपुर, मंडी और कुल्लू के राजस्व जिलों के लिए मंडलायुक्त मंडी को मध्यस्थ नियुक्त किया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के ध्यान में यह भी लाया गया कि मंडलायुक्त शिमला और मंडी नियमित प्रशासनिक कार्यों के अलावा राजस्व मामलों के बोझ से दबे हुए हैं।

उनके पास भूमि के मुआवजा निर्धारण से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने के लिए समय नहीं है। अदालत ने पाया कि ऐसी परिस्थितियों में दावेदारों और उनके वकीलों को इधर-उधर दौड़ना पड़ता है और प्राधिकारी के निर्णय के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ता है। जब निर्णय नहीं दिया जाता है, तो असहाय दावेदारों के पास अदालत का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है, जो अदालतों के समक्ष मुकदमों को बढ़ाता है।

न्यायालय ने कहा कि इस बेहद गंभीर मामले पर एनएचएआई और केंद्र सरकार की ओर से विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है। अदालत ने मध्यस्थ की ओर से लंबित मामलों का निपटारा करने के लिए समय बढ़ाने के आवेदन पर यह आदेश पारित दिए। अदालत ने याचिकाओं में मध्यस्थता की कार्यवाही पूरी करने के लिए 28 फरवरी 2024 तक का समय दिया है।

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

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