
#ख़बर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
7 अगस्त 2024
सोलन। मधुमक्खी पालन उद्योग परिसंघ (सीएआई) ने नौणी विवि में एक सेमिनार किया। जिसमें भारत में मधुमक्खी पालन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कार्यशाला में सरकारी एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों और मधुमक्खी पालन व्यवसायों के प्रतिनिधियों समेत अन्य 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके चौहान ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने आजीविका और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने विविधीकरण के साधन के रूप में मधुमक्खी पालन की प्रशंसा की और किसानों को विभिन्न मधुमक्खी उत्पादों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। मधुमक्खी पालन विशेषज्ञ डॉ. हरीश कुमार शर्मा ने मधुमक्खी पालन क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे, परिचालन और सरकारी समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने परागण सेवाओं और रोजगार सृजन में मधुमक्खी पालन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। सीएआई के अध्यक्ष देवव्रत शर्मा ने संगठन के लक्ष्य एवं संचालन पर चर्चा की। उन्होंने साझा किया कि उनकी कंपनी वर्तमान में हाइव स्रोतों से लगभग 50 मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन करती है और विश्वास व्यक्त किया कि सदस्यों के समर्थन से उत्पाद शृंखला का विस्तार किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश में उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले शहद के लिए स्थानीय मधुमक्खी पालकों को विपणन सहायता का भी आश्वासन दिया। साथ ही मूल्य और मधुमक्खी पालकों की आय बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश के शहद को जियो-टैगिंग करने की वकालत की। सेमिनार में मधुमक्खी रोग, मधुमक्खी प्रबंधन, छत्ता उत्पाद और विपणन चुनौतियों सहित विभिन्न विषयों पर दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनका नेतृत्व विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों, राज्य बागवानी विभाग और सीएआई अधिकारियों ने किया।





