मंडी: चनौल पंचायत में बहू-ससुर की जोड़ी बनी मिसाल, 53 वर्षीय नीलम बनीं प्रधान तो 96 साल के शंकर सिंह चौथी बार चुने गए उपप्रधान

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मंडी,
मंडी जिले के सुंदरनगर विकास खंड की चनौल पंचायत में इस बार पंचायत चुनाव के नतीजों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां बहू और ससुर की जोड़ी ने जीत हासिल कर राजनीति में एक अनोखी मिसाल पेश की है। 53 वर्षीय नीलम पंचायत प्रधान निर्वाचित हुई हैं, जबकि उनके 96 वर्षीय ससुर शंकर सिंह लगातार चौथी बार उपप्रधान चुने गए हैं। दोनों की जीत के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और लोग इसे अनुभव, जनसेवा और जनता के भरोसे की जीत मान रहे हैं।

96 वर्षीय शंकर सिंह पिछले पांच दशकों से पंचायत राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने वर्ष 1973 में पहली बार पंचायती राज चुनाव लड़ा था और तब से लगातार क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वह कई बार पंचायत प्रधान भी रह चुके हैं। पिछले 16 वर्षों से लगातार चनौल पंचायत के उपप्रधान पद पर काबिज हैं और इस बार भी जनता ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें जीत दिलाई। खास बात यह है कि इतनी उम्र होने के बावजूद शंकर सिंह आज भी पूरी सक्रियता के साथ लोगों के बीच रहते हैं और पंचायत के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उनका जोश और जनसेवा के प्रति समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा माना जा रहा है।

वहीं उनकी बहू नीलम भी लंबे समय से पंचायत राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने वर्ष 2010 में पहली बार पंचायत प्रधान का चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद वर्ष 2015 में वह जिला परिषद सदस्य चुनी गईं और क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर सक्रिय रहीं। हालांकि वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इस बार दमदार वापसी करते हुए प्रधान पद पर जीत दर्ज की। उनकी जीत को जनता के भरोसे और उनके लगातार जनसंपर्क का परिणाम माना जा रहा है।

इस परिवार की सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े माने जाते हैं। नीलम भाजपा समर्थक मानी जाती हैं, जबकि उनके ससुर शंकर सिंह कांग्रेस विचारधारा से जुड़े रहे हैं। बावजूद इसके पंचायत स्तर पर दोनों ने हमेशा जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी और अपनी अलग पहचान बनाई। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद परिवार और पंचायत हित में साथ काम करने की उनकी शैली लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

चनौल पंचायत में इस जीत को केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि अनुभव और नई सोच के संगम के रूप में देखा जा रहा है। गांव के लोग मानते हैं कि शंकर सिंह का अनुभव और नीलम की सक्रियता पंचायत के विकास को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।

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