पर्यावरण मानकों पर खरा नहीं उतरी सोलन जिले के परवाणू की मोरपेन दवा निर्माता कंपनी

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

8 जून 2023

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सोलन जिले के परवाणू की मोरपेन दवा निर्माता कंपनी पर्यावरण मानकों पर खरा नहीं उतरी है। संयुक्त जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष दायर की है। रिपोर्ट के माध्यम से ट्रिब्यूनल को बताया गया कि कंपनी शर्तों और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया है। कसौली तहसील के मसूलखाना निवासी मस्त राम के पत्र पर ट्रिब्यूनल ने संज्ञान लिया था। ट्रिब्यूनल ने प्रथम दृष्टया पाया था कि कंपनी पर पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप हैं

ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड, राज्य पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड और डीसी सोलन की संयुक्त जांच कमेटी गठित की थी। ट्रिब्यूनल ने कमेटी को आदेश दिए थे कि मामले की जांच करें और उपचारात्मक कदम उठाएं। ट्रिब्यूनल के आदेशों की अनुपालना में संयुक्त कमेटी ने बताया कि मोरपेन कंपनी की इटीपी 42 फीसदी घटी है। राज्य प्रदूषण बोर्ड ने कंपनी को सशर्त मंजूरी दी है।

इसमें कंपनी को केमिकल वेस्ट को पूरी तरह से खत्म करना होगा। इसके अलावा कंपनी पिछले चार सालों से केमिकल वेस्ट को निस्तारण के लिए बद्दी भेज रही है, जोकि प्रदूषण नियमों के खिलाफ है। कृषि योग्य भूमि, फसल, पीने का पानी इत्यादि के सैंपल भी लिए गए हैं। जांच के दौरान फसलों और जमीन में पोषक तत्वों में कमी पाई गई है। जबकि जिंक की मात्रा अत्यधिक है। संयुक्त कमेटी ने बताया कि कंपनी ने फैक्ट्री के अंदर बोरवेल लगाया है, जिसके लिए उसे मंजूरी मिली है। इसके अलावा कंपनी ने पानी का दूसरा कनेक्शन बिना स्वीकृति से लिया है। कमेटी ने कंपनी को हिदायत दी है कि जब तक सक्षम विभाग से अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक पानी के कनेक्शन को बंद रखा जाए।

बता दें कि पत्र के माध्यम से आरोप लगाया गया था कि कंपनी केमिकल वेस्ट को समीप के नालों में फेंक रही है, जिससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि गांव वालों की फसलों को भी नुकसान हो रहा है। केमिकल से पीने का पानी दूषित हो रहा है और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

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