
#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*
22 जून 2023
हिंदू हों या मुसलमान, हर धार्मिक समुदाय के लोग देश के जटिल तलाक कानूनों से मुक्ति चाहते हैं। सभी धर्मों के लोगों का मानना है कि देश में तलाक लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। यदि एक पक्ष न चाहे तो दूसरे पक्ष के लिए तलाक लेना लगभग असंभव सा हो जाता है। ऐसी स्थिति में लोगों को लंबे समय तक के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार इन परिस्थितियों में ज्यादा खतरनाक परिणाम सामने आते हैं जहां पति या पत्नी अपने जीवन साथी से छुटकारा पाने के लिए गैर-कानूनी रास्ते भी अपना लेते हैं। संभवतः इन्हीं परिस्थितियों का परिणाम है कि पुरुष और महिला, समान रूप से चाहते हैं कि देश के लिए बनाई जाने वाली समान नागरिक संहिता में पति-पत्नी के लिए तलाक लेने के लिए एक समान अवसर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कमेटी को भारी संख्या में इस तरह के सुझाव मिले हैं जहां लोग तलाक कानूनी प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग कर रहे हैं।
यूसीसी कमेटी को लोगों ने सुझाव दिया है कि पति-पत्नी में तलाक होने पर दोनों पक्षों के अधिकारों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। तलाक होने पर बच्चों पर पति-पत्नी का बराबर का अधिकार होना चाहिए। यदि पति-पत्नी के संबंध चलने लायक स्थिति में न रह जाएं तो उन्हें एक समयबद्ध प्रक्रिया के अंतर्गत अलग होने का अधिकार मिलना चाहिए।
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के लिए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लाने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। सूत्रों से मिली सूचना के अनुसार, कमेटी को यूसीसी पर अब तक लगभग 2.5 लाख सुझाव मिले हैं। उत्तराखंड में लगभग 20 लाख परिवार हैं। एक मोटे अनुमान के तौर पर यदि यह माना जाए कि हर सुझाव अलग-अलग परिवारों से आएं हैं तो राज्य की दस फीसदी से ज्यादा आबादी ने यूसीसी को लेकर अपने सुझाव कमेटी से साझा किए हैं।
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