
24 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | नौणी, सोलन

पोस्टर प्रस्तुति में डॉ. अमन चौहान को प्रथम पुरस्कार, मौखिक प्रस्तुति में शोधकर्ताओं की दो टीमों ने हासिल किए द्वितीय और तृतीय स्थान
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पादप रोग विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए तीन पुरस्कार हासिल किए हैं। वैज्ञानिकों को ये सम्मान 22 और 23 अक्टूबर को आईसीएआर-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), शिमला में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रदान किए गए।
‘जलवायु सहनशीलता, खाद्य सुरक्षा एवं सतत कृषि के लिए पादप स्वास्थ्य की भावी रणनीतियां’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इसमें जलवायु-अनुकूल कृषि, खाद्य सुरक्षा और फसल संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई।
पोस्टर प्रस्तुति में डॉ. अमन चौहान को पहला स्थान
पोस्टर प्रस्तुति श्रेणी में डॉ. अमन चौहान ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। उनका शोध चेरी और प्लम के पेड़ों में फाइटोप्लाज्मा संक्रमण की त्वरित पहचान के लिए LAMP आधारित परीक्षण पर केंद्रित था। इस शोध में डॉ. अनिल हांडा, डॉ. भूपेश गुप्ता और डॉ. अजय ब्राक्टा सह-लेखक रहे।
शोध के अनुसार, यह तकनीक एक घंटे के भीतर फाइटोप्लाज्मा संक्रमण की त्वरित और विशिष्ट पहचान करने में सक्षम है। इससे बागवानी फसलों में खेत स्तर पर रोगों की पहचान और बड़े पैमाने पर निगरानी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
जापानी फल के पत्तों के झुलसा रोग पर शोध को दूसरा पुरस्कार
मौखिक प्रस्तुति श्रेणी में डॉ. शालिनी वर्मा, निकिता नेगी, डॉ. सतीश कुमार शर्मा, डॉ. गोपाल सिंह और अनन्या बेनल की टीम को द्वितीय पुरस्कार मिला। टीम ने जापानी फल के पत्तों में झुलसा रोग के उभरने के कारणों की पहचान पर शोध प्रस्तुत किया। अध्ययन में हिमाचल प्रदेश में इस रोग से जुड़े रोगजनकों की पहचान की गई।
लहसुन के रोग पर अध्ययन के लिए तीसरा पुरस्कार
मौखिक प्रस्तुति में तृतीय पुरस्कार डॉ. मीनू गुप्ता, मुस्कान ठाकुर, डॉ. भूपेश गुप्ता और डॉ. अनुपमा सिंह को मिला। उनकी शोध प्रस्तुति लहसुन में बैंगनी धब्बा रोग उत्पन्न करने वाले अल्टरनेरिया प्रजाति के विभिन्न आइसोलेट्स में सांस्कृतिक, आकारिकी और रोगजनकता संबंधी विविधताओं पर आधारित थी।
यह अध्ययन लहसुन की फसल को प्रभावित करने वाले प्रमुख रोग के रोगजनकों में मौजूद विविधताओं को समझने में सहायक है।
कुलपति ने वैज्ञानिकों को दी बधाई
विश्वविद्यालय लौटने पर कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने पादप रोग विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा और उनकी टीम के शोध कार्यों की सराहना की।
कुलपति ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान विभाग में किए जा रहे गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक शोध को दर्शाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय के अन्य विभाग भी इससे प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपलब्धियां दर्ज करवाएंगे।
इन पुरस्कारों से पादप रोगों के निदान, रोगजनकों के अध्ययन और बागवानी एवं कृषि फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीतियां विकसित करने में विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को नई पहचान मिली है।





