
28 सितंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | पांवटा साहिब

पांवटा साहिब। विश्व रेबीज दिवस 2026 के अवसर पर उपमंडलीय पशु चिकित्सालय (SDVH) पांवटा साहिब में रेबीज की रोकथाम, पशुओं के टीकाकरण, जिम्मेदार पालतू पशु पालन और रेबीज संक्रमण से बचाव को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को रेबीज की रोकथाम और इससे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा, आईएएस ने किया। इस अवसर पर एसडीएम पांवटा साहिब द्विज गोयल, आईएएस, उप निदेशक पशुपालन एवं प्रजनन नाहन डॉ. राजीव वालिया, रोटरी क्लब पांवटा साहिब के अध्यक्ष यशपाल धीमान, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित महाजन सहित पांवटा साहिब उपमंडल के पशु चिकित्सा अधिकारी, पशुपालन विभाग के कर्मचारी, रोटरी क्लब के सदस्य, पशु प्रेमी और स्वयंसेवक मौजूद रहे।
उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने पांवटा साहिब क्षेत्र में पशु कल्याण और रेबीज की रोकथाम के लिए कार्य कर रहे विभिन्न व्यक्तियों, संस्थाओं एवं पशु प्रेमियों के प्रयासों की सराहना की।
पशु कल्याण में योगदान के लिए किया सम्मानित
पशु कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उपायुक्त ने तिरुपति ग्रुप के एमडी अशोक गोयल तथा रोटरी क्लब पांवटा साहिब को प्रशंसा पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किए। इसके अतिरिक्त पांवटा साहिब में पशु कल्याण के लिए निरंतर योगदान देने वाले पशु प्रेमियों एवं अन्य सहयोगियों को भी प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
300 एंटी-रेबीज वैक्सीन डोज उपलब्ध
विश्व रेबीज दिवस और Rotary Against Rabies Exposure (RARE) Programme के तहत रोटरी क्लब पांवटा साहिब ने प्रथम चरण के लिए 300 एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) डोज उपलब्ध करवाईं। इन वैक्सीन का उपयोग पशुपालन विभाग के माध्यम से स्ट्रीट एवं पालतू कुत्तों और बिल्लियों के निःशुल्क एंटी-रेबीज टीकाकरण के लिए किया जाएगा।
इस पहल से क्षेत्र में रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण के प्रयासों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रेबीज से बचाव को लेकर दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राजीव वालिया ने रेबीज जागरूकता एवं रोकथाम विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने रेबीज संक्रमण, पशुओं के नियमित टीकाकरण, जिम्मेदार पालतू पशु पालन, पशु के काटने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों और रेबीज के संपर्क में आने के बाद तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने के महत्व पर जानकारी दी।
उन्होंने रेबीज नियंत्रण में सामुदायिक सहभागिता की भूमिका के साथ-साथ पशुपालन विभाग की ओर से संचालित की जा रही विभिन्न गतिविधियों की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम में बताया गया कि रेबीज एक रोकथाम योग्य लेकिन घातक जूनोटिक बीमारी है। कुत्तों और बिल्लियों का समय पर टीकाकरण, जिम्मेदार पशु पालन, आवारा पशुओं के साथ अनावश्यक संपर्क से बचाव तथा पशु के काटने की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना मानव रेबीज से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के समापन पर आम जनता से रेबीज की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियानों में सक्रिय भागीदारी करने और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से “One Health एवं Zero Rabies Deaths” के लक्ष्य को हासिल करने में सहयोग देने का आह्वान किया गया।





