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हिमाचक ,
दुनिया से विलुप्त हो रही भूरे भालू की प्रजाति जनजातीय क्षेत्र पांगी में फल-फूल रही है। शनिवार को वन परिक्षेत्र किलाड़ की सुराल वन बीट के जंगल में बर्फ के गलेशियर को पार करता हुए दुर्लभ भूरा भालू दिखाई दिया। जिसे वन विभाग के कर्मचारी ने अपने कैमरे में तस्वीर लेकर कैद कर लिया।
यह प्रजाति दुनिया से खत्म होने की कगार पर है। यही वजह है कि सरकार ने इसको दुर्लभ प्रजाति की श्रेणी में रखा है। इस दुर्लभ वन्य जीव के दिखाई देने के बाद वन विभाग उसके संरक्षण को लेकर मुस्तैद हो गया है। वन मंडल अधिकारी ने किलाड़ रेंज के सभी कर्मचारियों को जंगलो में नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई इसका शिकार न करे। इससे पहले पांगी के सेचू नाला में यह वन्य जीव दिखाई दिया गया था। लेकिन, इस बार सुराल में इसकी मौजूदगी मिली है।
डीएफओ पांगी रवि कुमार गुलेरिया ने बताया कि सुराल में भूरे भालू को देखा गया है। उसके संरक्षण को लेकर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
भूरे भालू से जुड़ी खास बातें
भूरा भालू हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली सबसे दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों में से एक है।
भारत में इसकी मौजूदगी मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में दर्ज की जाती है।
यह प्रजाति आमतौर पर 3,000 से 5,000 मीटर की ऊंचाई वाले दुर्गम और ठंडे क्षेत्रों में निवास करती है।
भूरे भालू की संख्या लगातार घटने के कारण इसे संरक्षण की दृष्टि से संवेदनशील वन्यजीव माना जाता है।
अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आवास में कमी इसके अस्तित्व के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।
यह सर्वाहारी जीव है और घास, जड़ें, फल, कीड़े-मकोड़े तथा छोटे जीवों को भोजन के रूप में खाता है।
सर्दियों में लंबे समय तक बर्फबारी वाले क्षेत्रों में यह शीतनिद्रा (हाइबरनेशन) में चला जाता है।
किसी क्षेत्र में भूरे भालू की मौजूदगी वहां के पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता के स्वस्थ होने का संकेत मानी जाती है।
पांगी घाटी और लाहौल-स्पीति के दुर्गम इलाके हिमाचल में इसके महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास माने जाते हैं।





