
24 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | सुंदरनगर
पलौटा में किसानों ने एचपी शिवा परियोजना की मोनोरेल तकनीक को करीब से जाना, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों की कार्यप्रणाली की भी मिली जानकारी
सुंदरनगर के कृषक प्रशिक्षण केंद्र में हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना-द्वितीय की जिला परियोजना प्रबंधन इकाई सोलन के सौजन्य से संस्थागत विकास प्रक्रिया पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 22 से 24 अक्टूबर तक चले इस कार्यक्रम में सोलन जिले के 32 किसानों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को संस्थागत विकास की अवधारणा और व्यावहारिक पहलुओं से अवगत करवाना तथा सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना था। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. जगदीश जंजीहा ने किया।
समूह गठन और नेतृत्व विकास पर दी जानकारी
कार्यक्रम के शुभारंभ पर कृषक प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य डॉ. ओम प्रकाश बंसल और उप-प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश जंजीहा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। डॉ. जंजीहा ने संस्थागत विकास के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. नरेश कुमार ने स्वयं सहायता समूहों, किसान रुचि समूहों, किसान उत्पादक संगठनों और उपयोगकर्ता समूहों के गठन तथा उनकी कार्यप्रणाली की जानकारी दी। वहीं, विषय विशेषज्ञ डॉ. राजेश शर्मा ने संस्थागत प्रशासन, नेतृत्व विकास, समूह गतिशीलता और सहभागी निर्णय प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने सामुदायिक संस्थाओं को सशक्त बनाने में सामुदायिक प्रेरकों की भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में भी बताया।
पलौटा में मोनोरेल तकनीक का किया अध्ययन
प्रशिक्षण के तहत किसानों को मंडी जिले के पलौटा स्थित एचपी शिवा परियोजना का शैक्षणिक भ्रमण करवाया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने परियोजना के अंतर्गत स्थापित मोनोरेल तकनीक की कार्यप्रणाली और कृषि क्षेत्र में इसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी हासिल की।
प्रगतिशील किसान संजय कुमार ने एचपी शिवा परियोजना के तहत संचालित गतिविधियों की जानकारी साझा की। भ्रमण के माध्यम से किसानों को कृषि में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को समझने का अवसर मिला।
अर्जित ज्ञान को खेती में अपनाने का आह्वान
समापन अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. ओम प्रकाश बंसल ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के अनुभवों और उपयोगिता पर संवाद किया। उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान को अपने कृषि कार्यों में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग के लिए परियोजना के जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेंदर ठाकुर और परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान का आभार व्यक्त किया।






