आईजीएमसी शिमला: रोबोटिक सर्जरी से किडनी के कैंसर का सफल ऑपरेशन, पांच घंटे चली प्रक्रिया

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शिमला ,
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में रोबोटिक सर्जरी से किडनी से कैंसर को अलग कर व्यक्ति को नया जीवन दिया गया। सर्जरी विभाग की ओर से पहली बार रोबोटिक सर्जरी से ऑपरेशन किया गया और पांच घंटे चला। खास बात यह है कि रोबोट से आधी किडनी निकालकर कैंसर को अलग किया है। अब व्यक्ति पूरी तरह से ठीक है। चिकित्सकों का दावा है कि व्यक्ति की किडनी भी कार्य कर रही है। रोबोट से की गई सर्जरी सामान्य सर्जरी से काफी अलग रही। आमतौर पर सर्जरी में किडनी से कैंसर युक्त हिस्से को अलग करने के लिए लेप्रोस्कॉप या सामान्य ऑपरेशन का प्रयोग किया जाता था। इस ऑपरेशन में काफी जटिलताएं रहती हैं।

कैंसर युक्त हिस्से को करने के लिए पूरी किडनी को निकालना पड़ता था। इसमें काफी समय लगता था, साथ ही पूरी किडनी को निकालने के बाद फिट किया जाता था, लेकिन रोबाटिक सर्जरी से कुछेक प्रक्रिया आसान हो गई है, साथ ही अब समय भी कम लगता है। बीते दिनों व्यक्ति उपचार के लिए आईजीएमसी के सर्जरी विभाग में आया था। जहां पर जांच के दौरान व्यक्ति की किडनी में कैंसर पाया गया। इसे निकालने के लिए चिकित्सकों ने व्यक्ति को तैयार किया और हाल ही में रोबोटिक सर्जरी की गई। सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. पुनीत महाजन ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से किडनी में कैंसर का ऑपरेशन किया है। अब मरीज पूरी तरह से ठीक है। पहली बार इस प्रकार का ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी से हुआ है।

*जरनल वार्ड भर्ती मरीजों की 30,000 रुपये में होती है सर्जरी*

आईजीएमसी के जरनल वार्ड में भर्ती मरीजों की रोबोटिक सर्जरी 30,000 रुपये में होती है। इसी के साथ अगर स्पेशल वार्ड में मरीज को भर्ती किया जाता है तो 50,000 में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा दी जा रही है। ये शुल्क अस्पताल प्रबंधन की ओर से निर्धारित किए हुए हैं। रोबोटिक सर्जरी शुरू होने के बाद ब्लड लॉस भी काफी कम हो गया है। इससे काफी आसानी हो रही है, साथ ही ऑपरेशन के दौरान अतिरिक्त ब्लड की जरूरत भी नहीं पड़ रही है। सामान्य और लेप्रोस्कोप से होने वाले ऑपरेशन में ब्लड की जरूरत पड़ती थी।

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