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कुल्लू-
आगामी मानसून सीजन के मद्देनजर प्रदेश में आपदा प्रबंधन एवं राहत तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव, कमलेश कुमार पंत की अध्यक्षता में मंगलवार को वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त कुल्लू अनुराग चन्द्र शर्मा, पुलिस अधीक्षक मदन लाल, अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में आगामी मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रदेशभर में की जा रही तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। इस दौरान बताया गया कि 12 जून को टेबल टॉक ड्रिल तथा 15 जून को मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय एवं आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली की प्रभावशीलता का परीक्षण किया जा सके।

बैठक में जिला स्तर पर की गई तैयारियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान विभिन्न विभागों द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मानसून पूर्व तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतिकरण में विभागों की मैनपावर, उपलब्ध मशीनरी एवं आवश्यक सामग्री, सड़क संपर्क बहाली की कार्ययोजना, जल शक्ति, विद्युत एवं लोक निर्माण विभागों की तैयारियां, एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के साथ समन्वय, आवश्यक वस्तुओं के भंडारण तथा अग्रिम कार्ययोजना (एडवांस प्लानिंग) की जानकारी दी गई। साथ ही संभावित चुनौतियों, संसाधनों की उपलब्धता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।
इसके अलावा बांधों में अर्ली वार्निंग सिस्टम की कार्यप्रणाली, संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने, सैटेलाइट फोन की उपलब्धता, खाद्यान्न एवं दवाइयों के पर्याप्त भंडारण तथा विभिन्न विभागों में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में विशेष रूप से मानसून के दौरान धार्मिक यात्राओं एवं ट्रैकिंग गतिविधियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मौसम संबंधी चेतावनियों का समय पर प्रसार करने तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
उपायुक्त अनुराग चन्द्र शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन मानसून सीजन को लेकर पूरी तरह सतर्क है तथा सभी विभागों को संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी परिस्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम रखा जा सके।





