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मंडी के प्रख्यात साहित्यकार *डॉ. धर्मपाल कपूर* की 241वीं कृति *’डुगू’* का लोकार्पण शनिवार को गरिमामय एवं भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
यह पुस्तक बचपन की सहजता, प्रकृति के अविरल प्रवाह और वर्तमान में जीने की जीवन-दृष्टि को समर्पित है। पुस्तक का शीर्षक *’डुगू’* भी उसी सहज, निर्मल और निरंतर प्रवाहित होने वाले प्राकृतिक भाव का प्रतीक है। पुस्तक पाठकों को यह संदेश देती है कि जीवन को अनावश्यक तनाव और भविष्य की चिंताओं में उलझाने के बजाय वर्तमान क्षण को पूरी संवेदनशीलता और आनंद के साथ जीना ही सच्चा जीवन है।
पुस्तक की इसी भावना को साकार करते हुए इसका लोकार्पण किसी वरिष्ठ साहित्यकार के बजाय नन्हे बच्चों *कनव सेन* एवं *काश्वी सेन* के करकमलों से कराया गया। यह निर्णय इस विश्वास को अभिव्यक्त करता है कि बच्चे जीवन को सबसे अधिक स्वाभाविक, निष्कपट और पूर्णता के साथ जीते हैं तथा प्रकृति के सहज प्रवाह के सबसे निकट होते हैं।
इस अवसर पर *वल्लभ राजकीय महाविद्यालय, मंडी* के वनस्पति विज्ञान विभाग की *डॉ. तारा देवी सेन, **रूप कुमार उपाध्याय, **कुलदीप गुलेरिया* तथा *दक्षी* भी उपस्थित रहे।
उपस्थित सभी साहित्यप्रेमियों ने डॉ. धर्मपाल कपूर के साहित्य के प्रति अद्वितीय समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि 241 पुस्तकों का सृजन किसी भी साहित्यकार के लिए एक असाधारण उपलब्धि है, जो उनके निरंतर अध्ययन, सृजनशीलता और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का परिचायक है। उनके लेखन ने साहित्य-जगत को समृद्ध करने के साथ-साथ समाज को मानवीय संवेदनाओं, सकारात्मक चिंतन और जीवन मूल्यों से भी समृद्ध किया है।
कार्यक्रम में आशा व्यक्त की गई कि *’डुगू’* पाठकों को बचपन की सरलता, प्रकृति के साथ सामंजस्य तथा वर्तमान में जीने की प्रेरणा देकर तनावमुक्त, संतुलित और आनंदमय जीवन की ओर अग्रसर करेगी।





