
खबर अभी-अभी | 14 अगस्त 2026 |
मनाली।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर अतिरिक्त सेस लगाए जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता पहले ही महंगाई और बढ़ते आर्थिक बोझ से परेशान है, लेकिन सरकार लगातार नए टैक्स और शुल्क लगाकर आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त भार डाल रही है।
गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि 11 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि से पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर अतिरिक्त सेस लगाया गया है। उन्होंने इसे जनविरोधी कर नीति बताते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच इस तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम लोगों की परेशानियां और बढ़ाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुख्खू सरकार के सत्ता में आने के बाद डीजल पर वैट में लगातार बढ़ोतरी की गई। उनके अनुसार, जनवरी 2023 में डीजल पर वैट 4.40 रुपये से बढ़ाकर 7.40 रुपये प्रति लीटर किया गया और जुलाई 2023 में इसमें फिर 3 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 10.40 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में ही जनता पर डीजल के वैट के रूप में 6 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त बोझ डाला गया।
गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिसका प्रभाव किसान, बागवान, पर्यटन कारोबारी, व्यापारी, छोटे व्यवसायी और आम परिवारों के बजट पर पड़ता है। हिमाचल जैसे पहाड़ी और पर्यटन आधारित राज्य में इसका असर और व्यापक होता है।
उन्होंने सीमेंट पर अतिरिक्त गुड्स टैक्स बढ़ाने का भी मुद्दा उठाया। ठाकुर के अनुसार, सीमेंट पर अतिरिक्त गुड्स टैक्स 11 रुपये से बढ़ाकर 16 रुपये प्रति बैग किया गया, जिससे प्रति बैग 5 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्र स्तर पर जीएसटी में राहत के बाद जहां सीमेंट की लागत कम होने की उम्मीद थी, वहीं राज्य स्तर पर टैक्स बढ़ाए जाने से इसका लाभ प्रदेश की जनता को नहीं मिल पाया।
भाजपा नेता ने बिजली शुल्क और सब्सिडी में बदलाव, डिपुओं में मिलने वाली राहत में कमी, स्टाम्प ड्यूटी में बढ़ोतरी और एचआरटीसी किराए में वृद्धि जैसे फैसलों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन फैसलों से आम हिमाचली के घरेलू बजट पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
गोविंद सिंह ठाकुर ने सरकार से सवाल किया कि जब जनता पर लगातार टैक्स और शुल्क बढ़ाए जा रहे हैं तो इनसे जुटाए जा रहे अतिरिक्त संसाधनों का इस्तेमाल कहां किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर बढ़ते कर्ज के बावजूद यदि विकास कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहे हैं, तो सरकार को अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं और खर्चों को लेकर जनता के सामने जवाब देना चाहिए।





