PMFME योजना में शिमला जिला प्रदेश में अव्वल, मिला बेस्ट परफॉर्मेंस अवॉर्ड

7 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | शिमला

PMFME Conclave 2026 में जिला नोडल अधिकारी संजय कंवर को मिला सम्मान, शिमला में 2,210 मामलों में ऋण स्वीकृत

शिमला। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) के प्रभावी क्रियान्वयन में जिला शिमला ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए बेस्ट परफॉर्मेंस अवॉर्ड हासिल किया है। नई दिल्ली में आयोजित PMFME Conclave 2026 के दौरान हिमाचल प्रदेश में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला नोडल अधिकारी संजय कंवर को यह सम्मान प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से प्रदान किया गया।

उपायुक्त ने टीम को दी बधाई

उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि PMFME योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में समर्पित सेवा और मूल्यवान योगदान पूरी टीम की सफलता है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्यमियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है।

शिमला में 2,210 मामलों में ऋण स्वीकृत

जिला स्तरीय समिति की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्ष 2021 से अब तक जिला शिमला में 3,297 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इनमें से 3,185 आवेदन बैंकों को ऋण स्वीकृति के लिए अनुशंसित किए गए। प्राप्त आवेदनों में से 2,210 मामलों में ऋण स्वीकृत हो चुका है, जबकि 130 आवेदन ऋण प्रक्रिया के अधीन हैं।

इसके अलावा 67 आवेदन अनुशंसित नहीं किए गए, जबकि 748 आवेदन बैंकों द्वारा अस्वीकृत किए गए हैं।

2026-27 में 284 नए मामले बैंकों को भेजे

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 अप्रैल से 5 सितंबर 2026 तक जिला उद्योग केंद्र, शिमला द्वारा 284 नए मामलों को विभिन्न बैंकों को ऋण स्वीकृति के लिए अनुशंसित किया गया है।

इन मामलों को जिले में स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्थानीय उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा देना उद्देश्य

अधिकारियों ने बताया कि PMFME योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय और संस्थागत सहायता देकर उन्हें मजबूत करना है। इसके माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।

योजना के तहत छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को ऋण से जुड़ी पूंजीगत सब्सिडी, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता तथा ब्रांडिंग और मार्केटिंग में सहयोग उपलब्ध करवाया जाता है।

योजना का विशेष जोर ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) के अनुरूप स्थानीय कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने पर है।

PMFME योजना के प्रमुख लाभ
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन में सहायता।
बैंक ऋण से जुड़ी 35 प्रतिशत तक क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी, निर्धारित सीमा के अनुसार।
तकनीकी प्रशिक्षण एवं कौशल विकास।
ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग में सहयोग।
स्थानीय उत्पादों और ODOP को बढ़ावा।
स्वयं सहायता समूहों (SHG), एफपीओ और सहकारी संस्थाओं को प्रोत्साहन।

इस अवसर पर अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी, उप निदेशक कृषि अजब नेगी, उप निदेशक बागवानी सुदर्शना नेगी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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