एलआर इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन में व्यक्तिगत रूपांतरण और मानवीय क्षमता पर व्याख्यान-सह-कार्यशाला

26 सितंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | सोलन

सोलन। एलआर इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, सोलन में “व्यक्तिगत रूपांतरण, मानवीय क्षमता एवं जन्मजात प्रतिभाओं की पहचान” विषय पर व्याख्यान-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान की प्राचार्य डॉ. निशा शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. (डॉ.) बी. एस. चौहान, आईजीएमसी, शिमला तथा आर. डी. औलख, Certifai Technologies FZCO, दुबई ने विशेषज्ञ वक्ताओं के रूप में विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को आत्म-जागरूकता, मानवीय क्षमताओं की पहचान, रचनात्मक सोच, समस्या-समाधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक और भविष्य में आवश्यक कौशलों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।

इस दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और अनुभवात्मक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी एवं शैक्षणिक परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने और अपनी जन्मजात प्रतिभाओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया गया।

प्राचार्य डॉ. निशा शर्मा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल अंक और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में सोचने, सृजन करने, समस्या का समाधान खोजने तथा बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए ऐसे व्यावहारिक और अनुभवात्मक कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों के लिए साइकोमेट्रिक टेस्ट, DMIT, कराडा स्कैन, ब्रेन बैलेंसिंग और ब्रेन जिम जैसी विभिन्न गतिविधियां भी करवाई गईं। विद्यार्थियों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और व्यक्तिगत क्षमताओं तथा प्रतिभाओं को समझने का अनुभव प्राप्त किया।

संस्थान की प्रबंध निदेशक डॉ. शची सिंह ने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान और कार्यशालाएं विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों को उपयोगी बताया।

कार्यक्रम की समन्वयक प्रोफेसर मेघा ठाकुर रहीं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में संकाय सदस्यों प्रोफेसर सुचिता ठाकुर, सुश्री भावना, प्रोफेसर प्रियंका शर्मा और प्रोफेसर अमृता ने सहयोग दिया। गैर-शिक्षण स्टाफ की ओर से राविका ने भी आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञ वक्ताओं का आभार व्यक्त किया गया। विद्यार्थियों ने व्याख्यान-सह-कार्यशाला को ज्ञानवर्धक और अनुभवात्मक बताते हुए भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाने की इच्छा व्यक्त की।

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