
15 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन की चर्चा के बीच धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस कवायद को जनता का ध्यान भटकाने वाला शगूफा बताते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नए जिले बनाने के बजाय मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और स्मार्ट वर्किंग पर जोर देने की जरूरत है।
शिमला विश्वविद्यालय में हमीरपुर छात्र एसोसिएशन के ‘हमीर संगम’ कार्यक्रम में पहुंचे सुधीर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार सड़कों के गड्ढे भरने जैसी बुनियादी जरूरतों पर पर्याप्त खर्च को लेकर सवालों के घेरे में है, तो नए जिले बनाने के लिए धन कहां से आएगा?
नए जिलों से बढ़ेगा वित्तीय बोझ
सुधीर शर्मा ने दावा किया कि नए जिलों के गठन पर प्रदेश को कई सौ करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। उनके अनुसार, नए प्रशासनिक ढांचे, कार्यालयों और सुविधाओं की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहे प्रदेश को किसी भी ऐसे फैसले से पहले उसके खर्च और संभावित लाभ का आकलन करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्ज लेकर प्रदेश चला रही है। ऐसे में नए जिलों पर खर्च करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि धन कहां से जुटाया जाएगा और इसका अन्य विकास कार्यों पर क्या असर पड़ेगा।
‘छह महीने तक इसी चर्चा में उलझी रहेगी जनता’
भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि नए जिलों की चर्चा से लोगों का ध्यान प्रदेश के वास्तविक मुद्दों से हट सकता है। उन्होंने कहा कि लोग इस बहस में उलझे रहेंगे कि कौन-सा नया जिला बनेगा, उनका क्षेत्र किस जिले में शामिल होगा और जिला मुख्यालय कहां होगा। उनके अनुसार, इस दौरान विकास और जनसमस्याओं से जुड़े मुद्दे पीछे छूट सकते हैं।
स्मार्ट वर्किंग और तकनीक पर जोर देने की जरूरत
सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल जिलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि आम जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध करवाना होना चाहिए। सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, ताकि लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें और फाइलों का निपटारा समयबद्ध तरीके से हो।
उन्होंने अधिकारियों की संख्या और फाइलों के विभिन्न स्तरों से गुजरने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने से पहले मौजूदा व्यवस्था की खामियों को दूर करना जरूरी है।
चुनावी गारंटियों पर भी उठाए सवाल
सुधीर शर्मा ने कांग्रेस सरकार की दस गारंटियों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने चुनावी वादों और प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों पर जवाब देने के बजाय नए जिलों की चर्चा को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।
उन्होंने हिमाचल में पहले हुए जिलों के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों में स्थानीय संस्कृति, भाषा और क्षेत्रीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, नए जिलों के गठन पर निर्णय लेने से पहले इसकी वास्तविक जरूरत, जनता को होने वाला लाभ और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता स्पष्ट होनी चाहिए।





