चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस बताए—तथ्यों के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास क्यों फैला रही : भूपेंद्र सिंह सिसोदिया

28 सितंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

शिमला। जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सिसोदिया ने चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

जश्न रेस्टोरेंट, शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में सिसोदिया ने कहा कि हालिया विवाद उन मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया, जिनमें चुनाव आयोग के भीतर कुछ प्रक्रियाओं को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया था। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि संबंधित निर्णय पूर्ण आयोग की बैठक में लिए गए थे और एसआईआर से जुड़े कुछ प्रशासनिक पहलुओं पर भी स्पष्टता दी गई।

सिसोदिया ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल को गंभीर आरोप तथ्यों, आधिकारिक दस्तावेजों और कानूनी आधार के साथ जनता के सामने रखने चाहिए।

SIR को लेकर जनता में भ्रम न फैलाने की अपील

सिसोदिया ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसी प्रक्रिया में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के साथ यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हों। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में दुर्गम क्षेत्रों, ग्रामीण इलाकों, वरिष्ठ नागरिकों, प्रवासी कामगारों और अन्य पात्र मतदाताओं तक निर्वाचन प्रक्रिया की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस यदि SIR या किसी अन्य चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाती है तो उसे अपने दावों के समर्थन में ठोस तथ्य और कानूनी आधार जनता के सामने रखना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक आरोपों के कारण लोगों के बीच चुनावी व्यवस्था को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति नहीं बननी चाहिए।

गौरतलब है कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग ने SIR के दौरान कुछ श्रेणियों में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया में बदलाव की जानकारी दी। आयोग के अनुसार, ‘unmapped’ और ‘logical discrepancies’ से जुड़े मामलों में बूथ लेवल अधिकारी घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर सकेंगे और सामान्य परिस्थितियों में संबंधित व्यक्ति को कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी।

आयोग के आंतरिक पत्राचार पर पूरे रिकॉर्ड के आधार पर चर्चा की मांग

सिसोदिया ने कहा कि आयोग के आंतरिक प्रशासनिक पत्राचार और अंतिम नीतिगत निर्णयों के बीच अंतर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालिया रिपोर्टों और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को एक साथ पढ़ना जरूरी है, ताकि सार्वजनिक बहस किसी एक पक्ष की व्याख्या तक सीमित न रहे।

चुनाव आयोग ने इससे पहले भी कहा था कि आयुक्तों की ओर से उठाए गए कुछ सवाल और सुझाव निर्णय प्रक्रिया के मसौदा चरण से संबंधित थे तथा आयोग के अनुसार अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।

राहुल गांधी के EVM संबंधी बयान का किया उल्लेख

सिसोदिया ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जून 2024 में ईवीएम को लेकर दिए गए बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक दलों को चर्चा का अधिकार है, लेकिन ऐसी बहस तथ्यात्मक और तकनीकी आधार पर होनी चाहिए।

2019 के ‘चौकीदार चोर है’ प्रकरण का भी जिक्र

सिसोदिया ने राहुल गांधी से जुड़े 2019 के सुप्रीम कोर्ट अवमानना प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के संबंध में राजनीतिक बयान देते समय विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।

2019 में राहुल गांधी ने राफेल मामले से संबंधित “चौकीदार चोर है” टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जोड़ने के लिए बिना शर्त माफी मांगी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए अवमानना कार्यवाही बंद कर दी थी और भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की बात कही थी।

हिमाचल के जनहित के मुद्दों पर जवाब मांगा

भूपेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता के सामने रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, ग्रामीण विकास और आर्थिक स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार से इन विषयों पर अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि प्रदेश में विकास कार्यों की गति क्या है, युवाओं के लिए रोजगार के कितने अवसर पैदा हुए हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं में कितना सुधार हुआ है और पंचायत एवं जिला परिषद स्तर पर विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं।

सिसोदिया ने कहा कि जिला परिषद और पंचायती राज संस्थाएं सीधे आम जनता से जुड़ी हैं। ऐसे में ग्रामीण विकास, सड़कों, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और पंचायतों की वित्तीय जरूरतों पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता एवं जवाबदेही पर सार्वजनिक बहस लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इस बहस का आधार आधिकारिक रिकॉर्ड, सत्यापित तथ्य और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिए।

सिसोदिया ने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और उससे पहले सामने आई रिपोर्टों को लेकर यदि कोई सवाल शेष हैं तो उनका समाधान तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कांग्रेस से हिमाचल के विकास, रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी उपलब्धियां और आगे की कार्ययोजना जनता के सामने रखने को कहा।

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