
8 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | हमीरपुर

पंचायत समिति बमसन टौणी देवी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में इस बार मुकाबला कांग्रेस बनाम भाजपा नहीं, बल्कि भाजपा बनाम भाजपा देखने को मिला। 15 वार्डों वाली पंचायत समिति में कांग्रेस अपना प्रत्याशी तक मैदान में नहीं उतार पाई, जबकि दोनों पदों के लिए भाजपा से जुड़े दो-दो प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला हुआ।
एसडीएम हमीरपुर संजीत सिंह की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे चुनावी बैठक शुरू हुई। सर्वसम्मति नहीं बनने के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान करवाया गया।
अध्यक्ष पद के लिए जंदड़ू वार्ड की पूजा कुमारी और पौहंज वार्ड की सुषमा देवी आमने-सामने थीं। मतदान में पूजा कुमारी को 10, जबकि सुषमा देवी को 5 मत मिले। इस तरह पूजा कुमारी ने 5 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर अध्यक्ष पद अपने नाम किया।
वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए पटनौण वार्ड के सुरेंद्र सिंह और बगवाड़ा वार्ड के विपिन कुमार के बीच मुकाबला हुआ। सुरेंद्र सिंह को 10 और विपिन कुमार को 5 मत मिले। सुरेंद्र सिंह भी 5 मतों के अंतर से उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष पूजा कुमारी ने कहा कि वह मिली जिम्मेदारी को पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ निभाएंगी और बमसन टौणी देवी के विकास को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने पंचायत समिति सदस्यों और भाजपा का आभार जताया।
उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने अपनी जीत का श्रेय प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रवेश कुमार, हमीरपुर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों को साथ लेकर क्षेत्र के विकास के लिए काम किया जाएगा।
कांग्रेस की गैरमौजूदगी ने खड़े किए सवाल
बमसन BDC चुनाव में कांग्रेस द्वारा प्रत्याशी न उतारना अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के पास संख्या बल नहीं था, या पार्टी ने रणनीतिक तौर पर चुनाव से दूरी बनाई?
दूसरी ओर, भाजपा से जुड़े दो-दो प्रत्याशियों के बीच हुआ सीधा मुकाबला स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर मौजूद राजनीतिक समीकरणों और शक्ति संतुलन की ओर भी इशारा कर रहा है।
चुनाव परिणाम के बाद पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने पूजा कुमारी और सुरेंद्र सिंह को बधाई दी। कांग्रेस विधायक रणजीत राणा भी दोनों नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते नजर आए।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस ने मैदान क्यों छोड़ा और भाजपा के भीतर आमने-सामने आए दोनों पक्षों के पीछे आखिर किसका राजनीतिक समर्थन था?
क्या यह सिर्फ स्थानीय स्तर की लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा थी, या इसके पीछे भाजपा की अंदरूनी राजनीतिक खींचतान और शक्ति परीक्षण भी था?
फिलहाल बमसन BDC चुनाव ने कांग्रेस की गैरमौजूदगी और भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर हमीरपुर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।





