शिमला की पिछड़ी पंचायत हिमरी के गांव गढाहु पंचायत ने पारित किया प्रस्ताव, सरकार जनहित में नोटिफाई करें स्कूल

#खबर अभी अभी शिमला ब्यूरो*

28 अगस्त 2023

शिमला ग्रामीण की दूरदराज की पिछड़ी पंचायत हिमरी के गांव गढाहु के एक मात्र प्राइमरी स्कूल को सरकार की तरफ से डी-नोटिफाई किए जाने से यहां पढ़ रहे बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ता दिख रहा है। इससे एक महीने पहले ही सरकार मिडल स्कूल गढाहु को भी बंद कर चुकी है। सरकार के रवैये से नाराज लोगों ने शिमला ग्रामीण की विधायक व लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मामले में दखल देने का आग्रह किया है।

स्थानीय उप-प्रधान ने गांव को भीष्म भूगोलिक परस्थितियों का हवाला देकर शिमला ग्रामीण के विधायक व मंत्री विक्रमादित्य सिंह सहित शिक्षा निदेशक से स्कूल को डी नोटिफाई नहीं करवाने का आग्रह किया था। मंत्री के आश्वासन के बावजूद सरकार ने स्कूल को डी -नोटिफाई कर दिया है। इससे नियम 4 के तहत बच्चों को शिक्षा के अधिकारी से वंचित होना पड़ेगा। उप प्रधान ने कहा कि अधिकारियों ने गलत आंकड़े पेश कर सरकार को गुमराह किया। अब यदि यहां पढ़ रहे तीन बच्चे स्कूल जाना भी चाहे तो उन्हें 7 किलोमीटर दूर जंगल का रास्ता तय कर हिमरी स्कूल पहुंचना पड़ेगा। जंगल का रास्ता होने के चलते यहां पर भालू और बाघ के हमले का खतरा रहता है। ऐसे में अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल न भेजने का निर्माण लिया है। ऐसे में सरकार के कठोर निर्णय ने पिछड़े क्षेत्र के नन्हे बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ गया है।

हिमरी पंचायत के पूर्व प्रधान व वर्तमान में उपप्रधान जगदीश वर्मा के शिमला ग्रामीण के विधायक व पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह सहित शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक पत्राचार कर गडाहु गांव की भूगोलिक स्थितियों से अवगत करवाया था। वर्मा का कहना है कि गढाहु गांव जंगल और नालों से घिरा हुआ क्षेत्र है। यहां पिछले एक दशक में आधा दर्जन लोग भालू का शिकार हो चुके हैं। कुछ वर्ष पहले ही स्थानीय महिला पर भालू ने जानलेवा हमला किया। वन विभाग में जानवरों के हमले के सभी मामले दर्ज है।

बावजूद इसके सरकार ने स्कूल को डी नोटिफाई कर दिया। ऐसे में यहां पढ़ रहे 3 बच्चों सहित अगले वर्ष स्कूल में एडमिशन लेने वाले 4 से 5 बच्चों का भविष्य भी अधर में पड़ चुका है। हैरानी की बात है कि इस गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तक की सुविधा नहीं है। इसके चलते स्थानीय लोगों में सरकार की कार्य प्रणाली को लेकर रोष व्याप्त है। उपप्रधान जगदीश वर्मा का कहना है कि यह यहां के बुजुर्गों ने शिक्षा की अलख जगाने के लिए 1974-75 में एक जनता स्कूल शुरू किया था।

इसके बाद 1979 में नियमों में छूट देकर सरकार ने इस स्कूल अपने अधीन कर दिया। यहां पर शिक्षा अर्जित करने वाले छात्र प्रदेश में अव्वल रहने के साथ डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी भी बन चुके हैं। गढाहु में 8 से 10 परिवार रहते हैं जिसमें छोटे 5 से 7 छोटे बच्चे हैं। जिसमें से तीन बच्चे प्राइमरी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। छात्रों की भविष्य से चिंतित होकर हिमरी पंचायत में प्रधान पूनम सूर्यवंशी की अध्यक्षता में प्रस्ताव पारित कर सरकार से जनहित में प्राइमरी स्कूल को फिर से नोटिफाई किए जाने की मांग की है। उपप्रधान जगदीश वर्मा का कहना है कि स्कूल को दोबारा से नोटिफाई न किए जाने की स्थिति में जनता ने प्रदेश उच्च न्यायालय की शरण में जाने का मन बनाया है।

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