
31 अगस्त 2026 | खबर अभी अभी | सोलन

आंजी। आजादी के 80 वर्ष पूरे होने के बावजूद घरोट पंचायत के आंजी गांव के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं। गांव तक सड़क नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए करीब एक घंटे का पैदल सफर तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है।
ग्रामीणों के लिए यह परेशानी केवल रोजमर्रा की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी आपात स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। गांव में यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
हाल ही में एक महिला के बीमार पड़ने पर गांव के सात से आठ लोगों ने उसे कंधे पर उठाकर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद महिला को आगे उपचार के लिए ले जाया गया। इस घटना ने एक बार फिर गांव में सड़क सुविधा की जरूरत को उजागर कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि आंजी गांव जिले के नजदीकी पंचायत क्षेत्रों में होने के बावजूद आज तक सड़क सुविधा से वंचित है। उनका कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
आपात स्थिति में बढ़ जाती है मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब होने या किसी अन्य आपात स्थिति में गांव तक वाहन पहुंचना संभव नहीं होता। ऐसे में मरीज को पैदल उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बरसात के दौरान स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
महिलाओं और बच्चों के लिए भी गांव से मुख्य सड़क तक का पैदल रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ग्रामीणों को इसी रास्ते का सहारा लेना पड़ता है।
वर्षों से सड़क की मांग, नहीं हुआ स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से गांव तक सड़क पहुंचाने की मांग सरकार और प्रशासन के समक्ष उठाते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द गांव तक सड़क का निर्माण करवाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास के इस दौर में भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना उनके लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि आंजी गांव की जमीनी स्थिति को देखते हुए जल्द कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बीमार या जरूरतमंद व्यक्ति को इस तरह कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक न ले जाना पड़े।





