एक माह में हटाने होंगे जंगलों में गिरे पेड़, अफसरों की जवाबदेही तय

#खबर अभी अभी सोलन ब्यूरो*

28 अगस्त 2023

CM Sukhvinder singh sukhu directions to forest department to curb Timber smuggling

हिमाचल के वन क्षेत्र में प्राकृतिक कारणों से गिरे और टूटे पेड़ों के उचित प्रबंधन के लिए प्रदेश सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की है। इसके तहत ऐसे पेड़ों के कटान से लेकर बिक्री के लिए उपलब्ध करवाने तक की प्रक्रिया को समयबद्ध पूर्ण करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है। निर्धारित अवधि में प्रक्रिया की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।

पेड़ों के चिह्नित करने से लेकर इनके अंतिम निपटान के लिए 30 दिन की अवधि तय की गई है। प्रारंभिक स्तर पर चार वृत्तों हमीरपुर, धर्मशाला, सोलन व शिमला के पांच वन मंडलों के तहत सात वन परिक्षेत्रों में यह मानक संचालन प्रक्रिया एक सितंबर 2023 से पायलट आधार पर शुरू की जाएगी। अगले चरण में जुलाई 2024 से इसे पूरी तरह से प्रदेश के छह वन वृत्तों के 70 वन परिक्षेत्रों तक लागू किया जाएगा।

नई मानक संचालन प्रक्रिया के तहत किसी वन परिक्षेत्र में 25 से कम क्षतिग्रस्त पेड़ों के निस्तारण के लिए एक निश्चित समयसारिणी तैयार की गई है, जिसमें पेड़ों के चिह्नित करने से लेकर इनके अंतिम निपटान तक 30 दिन की अवधि तय की गई है। महीने के पहले सात दिनों में वन रक्षक और वन निगम के कर्मचारी इससे संबंधित ब्योरा तैयार करेंगे। आगामी तीन दिनों में उप वन परिक्षेत्राधिकारी ऐसे पेड़ों का चिन्हांकन करेंगे और इससे संबंधित सूची वन परिक्षेत्राधिकारी को अगले तीन दिनों में सौंपेंगे।

वन परिक्षेत्राधिकारी सात दिनों के भीतर पेड़ों के कटान, इन्हें लट्ठों में बदलने और निर्दिष्ट डिपो तक उत्पाद के परिवहन से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि नई मानक संचालन प्रक्रिया से स्थानीय स्तर पर इमारती लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएंगे। परिवहन व्यय में कमी, राजस्व में वृद्धि और स्थानीय स्तर पर कार्यरत कर्मियों की क्षमता में भी वृद्धि तय की जाएगी।

वन मंडलाधिकारी को सूचित करेंगे परिक्षेत्राधिकारी 
परिक्षेत्राधिकारी वन मंडलाधिकारी को सूचित करेंगे और वह माह की 22 व 23 तारीख को वन निगम में अपने समकक्ष से संपर्क कर निष्कर्षण लागत और परिवहन व्यय निर्धारित करने के बारे में अवगत करवाएंगे। इसके साथ ही वन मंडलाधिकारी निष्कर्षण, परिवहन लागत और रॉयल्टी के आधार पर बिल तैयार कर इसे वन निगम के मंडलीय प्रबंधक को भेजेंगे।

बिल की अदायगी पर माह की 24 से 26 तारीख के मध्य उत्पादित माल वन निगम को भेज दिया जाएगा। यदि वन निगम इसे लेने से मना करता है तो वन परिक्षेत्राधिकारी माह की 27 एवं 28 तारीख को विभागीय स्तर पर नीलामी की प्रक्रिया आरंभ करेगा और इसके लिए हिमाचल प्रदेश वन विभाग के प्रबंधन विंग की ओर से आरक्षित मूल्य निर्धारित किया जाएगा।

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