पहलगाम हमले के बाद भारत के सख्त रुख से पाकिस्तान में पानी का संकट गहराया, सिंध-बलूचिस्तान में हालात गंभीर

खबर अभी अभी
नई दिल्ली:
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के फैसले का असर अब पाकिस्तान में साफ दिखाई देने लगा है। जल संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में नेताओं की तीखी बयानबाजी भी तेज हो गई है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसद्दिक मलिक ने भारत को धमकी देते हुए कहा कि “जो हमारे पानी को छुएगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे।”

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी दावा किया कि सिंधु जल संधि को कोई एक देश एकतरफा समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने भारत के उस रुख पर भी टिप्पणी की, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान को पानी की एक बूंद भी नहीं दी जाएगी।

भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा था कि “आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि भारत का पानी उन लोगों तक नहीं पहुंचेगा जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।

पाकिस्तान में गहराया जल संकट

पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। कृषि आधारित इन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की भारी कमी से किसान परेशान हैं और फसलों पर संकट मंडरा रहा है।

सिंधु नदी पर बने सुक्कुर बैराज में भी पानी का स्तर चिंताजनक रूप से घटा है। रिपोर्टों के मुताबिक नॉर्थ वेस्ट कैनाल में 64.1%, राइस कैनाल में 38% और दादू कैनाल में 82% तक पानी की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो पाकिस्तान की कृषि और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

प्रांतों के बीच भी बढ़ा विवाद

जल संकट के चलते पाकिस्तान के भीतर भी तनाव बढ़ रहा है। सिंध सरकार ने पंजाब पर अपने हिस्से से अधिक पानी लेने का आरोप लगाया है। सिंध का कहना है कि ऊपरी क्षेत्रों में ज्यादा पानी रोके जाने से निचले इलाकों में हालात और बिगड़ गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती पानी की कमी के बीच पाकिस्तान के नेताओं की आक्रामक बयानबाजी घरेलू दबाव को कम करने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है।

Share the news