हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद: खड़गे के अपमान के विरोध में शिमला में कांग्रेस का शांति मार्च, भाजपा से सार्वजनिक माफी की मांग

14 अगस्त 2026 | खबर अभी-अभी
शिमला।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ और हवन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गया है। शुक्रवार को शिमला में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांति मार्च निकालकर इस घटना का विरोध किया और इसे दलित विरोधी मानसिकता से जोड़ते हुए भाजपा से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंदरजीत सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शेरे पंजाब से विरोध मार्च निकाला। मार्च ऐतिहासिक रिज मैदान पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पहुंचा, जहां कार्यकर्ताओं ने घटना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस ने जताया कड़ा विरोध

जिला कांग्रेस अध्यक्ष इंदरजीत सिंह ने आरोप लगाया कि 8 अगस्त को हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद मंच को गंगाजल से धोने और हवन करने की घटना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई सामाजिक समानता और संविधान की भावना के खिलाफ है।

इंदरजीत सिंह ने मांग की कि इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।

भाजपा और RSS की विचारधारा पर निशाना

शिमला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष हरिकृष्ण हिमराल ने भाजपा और RSS की विचारधारा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि ऐसी घटनाएं समाज में विभाजन को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि देश संविधान और समान नागरिक अधिकारों के आधार पर आगे बढ़ा है तथा कांग्रेस संविधान, दलितों और आम जनता के सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े इस मामले ने भाजपा की कथित सामाजिक सोच को उजागर किया है।

मेयर सुरेंद्र चौहान ने भी साधा निशाना

शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि 21वीं सदी में भी जाति के आधार पर भेदभाव और समाज को बांटने वाली सोच चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय लोगों से वोट मांगना और बाद में कथित तौर पर भेदभावपूर्ण व्यवहार करना लोकतांत्रिक और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

समानता के अधिकार का मुद्दा उठाया

कांग्रेस नेता नरेश गांधी ने संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लेख करते हुए जातिवाद की सोच की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि भगवान राम के आदर्शों की बात करने वाले लोगों को समाज में समानता और भाईचारे के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।

उन्होंने चुनाव के दौरान आम लोगों से समर्थन मांगने और बाद में भेदभाव किए जाने की कथित मानसिकता की कड़ी निंदा की।

विवाद ने पकड़ा राजनीतिक रंग

हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। कांग्रेस ने इसे सामाजिक और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए विरोध तेज किया है। वहीं, पूरे मामले में लगाए जा रहे आरोपों और उनकी राजनीतिक व्याख्या के बीच वास्तविक घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक तथ्यों और संबंधित पक्षों का पक्ष भी महत्वपूर्ण रहेगा।

शिमला में कांग्रेस का यह प्रदर्शन अब इस विवाद को हिमाचल की राजनीति में भी चर्चा का मुद्दा बना चुका है।

Share the news