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नई दिल्ली: हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व आतंकी बुरहान वानी की 10वीं बरसी से पहले पाकिस्तान के कराची में कथित तौर पर आतंकवादी संगठनों की एक गुप्त बैठक आयोजित होने का दावा किया गया है। खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, इस बैठक में भारत विरोधी गतिविधियों और जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की कथित साजिश पर चर्चा की गई।
बताया जा रहा है कि 5 जुलाई को कराची स्थित पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के मुख्यालय में हुई इस बैठक में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े तत्वों के अलावा आईएसआई से कथित तौर पर जुड़े कुछ लोग भी मौजूद थे। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में बुरहान वानी की बरसी के दौरान घाटी में माहौल बिगाड़ने और युवाओं को उकसाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
खुफिया सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कथित तौर पर एक संदेश पढ़कर सुनाया गया, जिसमें घाटी में मौजूद स्लीपर सेल को सक्रिय करने और युवाओं तक हथियार पहुंचाने जैसी योजनाओं का उल्लेख था। यह भी दावा किया गया है कि इस पूरे अभियान के संचालन की जिम्मेदारी मुजफ्फराबाद से संचालित किए जाने की योजना बनाई गई।
सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में प्राप्त खुफिया इनपुट केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा कर दिए गए हैं। इसके बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी संभावित आतंकी गतिविधि से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे इनपुट सही साबित होते हैं, तो यह सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिश का संकेत है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा बल और खुफिया एजेंसियां किसी भी नापाक मंसूबे को सफल नहीं होने देने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं।





