शिमला में सीताराम येचुरी की स्मृति में श्रद्धांजलि सेमिनार, राजनीतिक एवं वैचारिक योगदान को किया याद

24 सितंबर | खबर अभी अभी | शिमला

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की शिमला जिला कमेटी की ओर से कालीबाड़ी हॉल, शिमला में पार्टी के पूर्व महासचिव एवं वरिष्ठ नेता कॉमरेड सीताराम येचुरी की स्मृति में श्रद्धांजलि सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में पार्टी के राज्य सचिव कॉमरेड संजय चौहान मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। जिला सचिव कॉमरेड विजेंद्र मेहरा और लोकल कमेटी सचिव कॉमरेड जगत राम ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत से पहले उपस्थित कार्यकर्ताओं ने सीताराम येचुरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में पार्टी के विभिन्न पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं सहित करीब 200 लोगों ने हिस्सा लिया।

मेहनतकश जनता के सवालों को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ने पर चर्चा

वक्ताओं ने कहा कि सीताराम येचुरी भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के महत्वपूर्ण नेताओं में रहे। उन्होंने संसदीय राजनीति को जनसंघर्षों से जोड़ते हुए श्रमिकों, किसानों, युवाओं, छात्रों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में उठाया।

सीपीआई(एम) के अनुसार, येचुरी ने छात्र राजनीति से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और आपातकाल के दौरान गिरफ्तार हुए। वह 2015 से 2024 तक पार्टी के महासचिव रहे।

वक्ताओं ने बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण, श्रम अधिकार, सार्वजनिक क्षेत्र और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उनके राजनीतिक हस्तक्षेप का उल्लेख किया।

संसद और जनसंघर्षों को पूरक मानने की बात

सेमिनार में उनके संसदीय योगदान पर भी चर्चा हुई। येचुरी 2005 से 2017 तक दो कार्यकाल के लिए राज्यसभा के सदस्य रहे।

वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने आर्थिक नीतियों, श्रम कानूनों, सार्वजनिक क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संघीय ढांचे से जुड़े प्रश्नों को संसद में उठाया। उनके अनुसार, संसद के भीतर उठाए गए मुद्दों को जनसंघर्षों से जोड़ना उनकी राजनीतिक कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

स्वतंत्र विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा

सेमिनार में सीताराम येचुरी की विदेश नीति संबंधी भूमिका पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, राष्ट्रीय संप्रभुता और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रगतिशील आंदोलनों के साथ एकजुटता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

फिलिस्तीन के सवाल पर भी उनके सार्वजनिक राजनीतिक रुख और फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों के समर्थन का उल्लेख किया गया।

धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक एकता पर जोर

वक्ताओं ने कहा कि येचुरी ने सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता के सवालों को भारतीय लोकतंत्र और संविधान से जोड़कर देखा। उन्होंने विभिन्न धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक राजनीतिक शक्तियों के बीच व्यापक संवाद और एकता की वकालत की।

मार्क्सवादी विचारक और लेखक के रूप में योगदान

सेमिनार में उनके वैचारिक और बौद्धिक योगदान पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि येचुरी मार्क्सवादी विचारक, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक के रूप में सक्रिय रहे तथा समकालीन भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था, साम्राज्यवाद, सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता जैसे विषयों पर लेखन किया।

सीपीआई(एम) की ओर से जारी श्रद्धांजलि वक्तव्य के अनुसार, येचुरी ने पार्टी की वैचारिक दिशा तय करने में तीन दशकों से अधिक समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

सेमिनार के अंत में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने सीताराम येचुरी के राजनीतिक एवं वैचारिक योगदान को याद करते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय हस्तक्षेप जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

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