शूलिनी विश्वविद्यालय में आयोजित वाईएसएस के ‘आदर्श जीवन’ कैंप में 200 बच्चे शामिल हुए

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सोलन,
जून 1
सोलन-स्थित शूलिनी विश्वविद्यालय में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया (YSS) के संन्यासियों और सेवकों ने देशभर से आए 200 बच्चों का सात-दिवसीय आध्यात्मिक ग्रीष्मकालीन शिविर में स्वागत किया। यह युवा शिविर आधुनिक समय के आध्यात्मिक गुरुओं में से सर्वप्रिय माने जाने वाले गुरु श्री श्री परमहंस योगानन्दजी द्वारा दी गई ‘आदर्श जीवन’ की शिक्षाओं पर आधारित है। इस शिविर में प्रतिभागियों को राजयोग ध्यान के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान कर संतुलित जीवन शैली विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इस अनूठे शिविर में बच्चे दिन में दो बार सामूहिक ध्यान में भाग लेंगे। साथ ही वे अन्य कार्यक्रमों की एक सुव्यवस्थित दैनिक दिनचर्या का पालन करेंगे। इसमें संन्यासी द्वारा सत्संग, योगदा सत्संग ध्यान प्रविधियों की पुनरावलोकन कक्षाएँ, कला और शिल्प एवं सृजनात्मक कक्षाएँ, खेलकूद एवं स्पोर्ट्स का समय और साथ ही प्रकृति की सैर और हाइक भी शामिल हैं।
31 मई की सुबह और दोपहर में वाईएसएस के संन्यासियों और शूलिनी विश्वविद्यालय चांसलर प्रोफ पी. के. खोसला एवं वाईस चांसलर प्रोफ अतुल खोसला के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और उपस्थित प्रतिभागियों से प्रेरणादायक बातें साझा कीं।
स्वामी शंकरानन्द ने संस्कृत में ब्रह्म-स्तुति गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद स्वामी ललितानन्द ने अमेरिका से वाईएसएस/एसआरएफ़ के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानन्द गिरि द्वारा इस अवसर के लिए विशेष रूप से भेजा गया संदेश पढ़ा। संदेश में अध्यक्ष स्वामीजी ने युवा प्रतिभागियों को शिविर का उपयोग आत्म-अनुशासन, आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
बालिका शिविर के उद्घाटन-सत्र के दौरान स्वामी निर्मलानन्द ने परमहंस योगानन्दजी द्वारा बच्चों के लिए दिए गए ‘आदर्श जीवन’ के सिद्धांत का उल्लेख किया, जो हिमालय की शांत नगरी सोलन में होने वाले इस अनूठे शिविर के आयोजन के अनुरूप है। उन्होंने योगानन्दजी के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा : “भारत के आध्यात्मिक गुरु कहते हैं कि आदर्श रूप से, स्कूली बच्चों को आधुनिक शहरों के प्रलोभनों से भरे स्कूली वातावरण से दूर ले जाना चाहिए…। उन्हें प्रकृति के बीच और प्रशिक्षित शिक्षकों की संगति में रखना चाहिए जो स्वास्थ्य, नैतिकता और सांसारिक एवं आध्यात्मिक दक्षता में आदर्श हों।”
इस अवसर पर, शूलिनी विश्वविद्यालय के चांसलर प्रोफ पी. के. खोसला ने कहा : “ये बच्चे बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्हें ध्यान करने का यह अवसर मिला है, और मेरी कामना है कि ये विद्यार्थी — अपने आध्यात्मिक जीवन के साथ — इस राष्ट्र के चमकते सितारे बनें।”
वाईस चांसलर प्रोफ अतुल खोसला ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पूरे जुनून के साथ अपने सपनों को पूरा करें। उन्होंने कहा, “आप में से कई लोग गुरुजी की शिक्षाओं और मार्गदर्शन का पूरी लगन से पालन करेंगे। मुझे विश्वास है कि गुरुजी भी यही चाहेंगे कि आप अपनी आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सफलता भी हासिल करें।”
बालकों के शिविर को संबोधित करते हुए स्वामी शंकरानन्द ने कहा, “जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य भगवत प्राप्ति है। बाकी सभी लक्ष्य—धन-दौलत, नाम, यश, सत्ता—जीवन के अंत में छोड़ देने पड़ते हैं। आत्मा के साथ जो रह जाते हैं, वे हैं हमारे अच्छे कर्म और ईश्वर के प्रति प्रेम। इसीलिए, कम उम्र से ही आत्म-साक्षात्कार की खोज करना सीखना महत्वपूर्ण है। इतनी कम उम्र में ही आध्यात्मिक यात्रा शुरू करने के लिए आप सभी को बधाई। आप सभी संसार का बहुत कल्याण करेंगे।”

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