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शिमला ,
शिमला-मटौर फोरलेन के एम्स बिलासपुर से लेकर भराड़ीघाट तक चल रहे निर्माण कार्य ने दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। जगह-जगह उखाड़ी गई सड़क पर वाहन चलाना जान जोखिम में डालने जैसा है। धूल इतनी ज्यादा उड़ती है कि सामने से आ रही गाड़ी भी नजर नहीं आती। दोपहिया वाहन चालकों को सफर करना और भी मुश्किल भरा हो जाता है।इसलिए इस मार्ग पर मुसाफिरों को संभलकर सफर करना पड़ रहा है। सड़क पर पड़े गड्ढों के कारण हर दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं। दिनभर उड़ती धूल से दुकानदार भी परेशान हैं। दुकानों की सफाई करते ही दिन गुजर जाता है। मिठाई की दुकानों और ढाबा संचालकों का काम बंद हो गया है। लोग मिठाई खरीदने से गुरेज करते हैं। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य कर रही कंपनी को दिन में पांच-छह बार टैंकर से पानी फेंकना चाहिए, ताकि धूल से निजात मिले।
दुकानों को साफ रखने में निकल जाता है दिन
ब्रह्मपुखर चौक पर हार्डवेयर की दुकान चलाने वाले कालीदास शर्मा बताते हैं कि उनका दिन साफ-सफाई और झाड़ू मारने में चला जाता है। कंपनी के अधिकारियों को दिन में पानी फेंकने के लिए कहते हैं तो कई बार बहस होती है। पानी के पाइप उखड़ने से करीब डेढ़ माह से पेयजल की समस्या चल रही है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
जगह-जगह पानी के पाइप और खंभे उखाड़ दिए: सुरेश
मोबाइल शॉप के मालिक सुरेश कुमार ने बताया कि इस चौक पर सड़क का लेवल बराबर है। कंपनी को चाहिए कि एक तरफ टारिंग कर दी जाए तो दिक्कत कम होगी। कंपनी ने जगह-जगह पानी के पाइप और खंभे उखाड़ दिए हैं, जिससे बिजली-पानी की समस्या हर दिन बनी रहती है। पानी की समस्या के बारे में बात करते हैं तो कंपनी के अधिकारी कभी-कभार तो पाइप ठीक कर देते हैं, लेकिन ज्यादातर प्रदेश के जलशक्ति विभाग का काम बताकर पल्ला झाड़ते हैं।
धूल उड़ने से दमा और खांसी के मरीजाें की परेशानी बढ़ी: अजय
जालपा मेडिकल स्टोर के मालिक अजय कुमार शर्मा ने बताया कि धूल उड़ने से दमा और खांसी के मरीजाें की परेशानी बढ़ गई है। लोगों को सांस लेना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोग बाहर नहीं निकलते हैं। एम्स बिलासपुर के पास मेडिकल स्टोर के मालिक रवि ठाकुर ने बताया कि एम्स आने वाले मरीज और उनके तीमारदार धूल और उखाड़ी गई सड़क से परेशान हैं। यहां करीब पांच-माह से काम चल रहा है। प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल होने के कारण यहां पूरे प्रदेश से मरीज पहुंचते हैं। इसलिए यहां का काम जल्दी होना चाहिए था।
मरीज व उनके तीमारदार धूल से परेशान
ब्रह्मपुखर चौक पर मिठाई की दुकान चला रहे मनोज ने बताया कि जो सड़क थोड़ी-बहुत आवाजाही के लिए ठीक थी, वह भी कंपनी की बड़ी-बड़ी एलएंडटी चेन वाली गाड़ियों से उखड़ गई है। कंपनी के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने सड़क दुरुस्त करने का आश्वासन दिया, लेकिन टारिंग नहीं की। कारोबारियों और टैक्सी चालकों का यहां काम खत्म हो गया है। एम्स बिलासपुर के पास मेडिकल स्टोर के मालिक रवि ठाकुर ने बताया कि एम्स आने वाले मरीज व उनके तीमारदार धूल व उखाड़ी गई सड़क से परेशान हैं।
निर्माण कार्य में कुछ समस्याएं आती ही हैं। दिन में कंपनी के टैंकर पानी फेंकते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम के कारण पानी जल्दी सूख जाता है। कई जगह कंपनी ने बोरवेल लगाए थे, लेकिन गर्मी के चलते उनमें पानी का स्तर नीचे चला गया है, जिससे समस्या हो रही है। जो पानी के पाइप और बिजली के खंभे फोरलेन के निर्माण के कारण टूटते हैं, उन्हें दुरुस्त करने का प्रयास करते हैं। एम्स के पास काम में देरी इसलिए हुई, क्योंकि एम्स प्रबंधन और एनएचएआई के बीच फोरलेन का रूट तय नहीं हो पा रहा था। यहां अंडरपास भी बना रहे हैं। कंपनी का प्रयास है कि अगस्त तक इस क्षेत्र में टारिंग कर दी जाएगी।
– कविराज चौहान, प्रोजेक्ट मैनेजर, गाबर कंस्ट्रक्शन कंपनी





